
केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने मंगलवार को प्याज की कीमत और निर्यात को लेकर एक बैठक बुलाई है. इस बैठक की अध्यक्षता उपभोक्ता मामलों की असिस्टेंट डायरेक्टर मुस्कान जैन करेंगी. इस बैठक में प्याज निर्यातक संघ के प्रतिनिधि शामिल होंगे. बैठक को लेकर मंत्रालय ने एक मीटिंग नोटिस जारी किया है.
मीटिंग नोटिस में लिखा है, 'अधोहस्ताक्षरी को यह सूचित करने का निर्देश दिया गया है कि प्याज की कीमतों और निर्यात के संबंध में, प्याज निर्यातक संघों के सदस्यों के साथ एक बैठक 7 अप्रैल, 2026 को सुबह 11:30 बजे सचिव (DoCA) की अध्यक्षता में निर्धारित की गई है. यह बैठक नई दिल्ली स्थित कृषि भवन के कमरा संख्या 46 में हाइब्रिड मोड में आयोजित की जाएगी.'
यह बैठक ऐसे समय में होने जा रही है जब देश में प्याज की कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट है. इस गिरावट से व्यापारी और किसान दोनों परेशान हैं. प्याज का निर्यात खुलने के बाद भी कीमतों में कोई बड़ा सुधार नहीं दिख रहा है. इसे देखते हुए उपभोक्ता मंत्रालय ने आगे की रणनीति पर मंथन के लिए एक्सपोर्टर्स के साथ यह बैठक बुलाई है.
बैठक का एजेंडा अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन जानकारों का कहना है कि इसमें प्याज के प्रोक्योरमेंट पर बात हो सकती है क्योंकि मीटिंग की अध्यक्षता उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय कर रहा है. प्याज एक्सपोर्ट से जुड़े एक विशेषज्ञ ने 'किसान तक' से कहा, पिछले साल भी चिट्ठी जारी की थी, लेकिन उसका कोई रिजल्ट नहीं निकला, इस बार उम्मीद है कि प्याज एक्सपोर्ट पर कोई सार्थक रास्ता निकलेगा. पिछले साल प्याज भंडारण पर बात हुई थी, इस बार भी चर्चा हो सकती है. सरकार की कोशिश है कि प्याज की सड़न को कैसे कम करें ताकि उपभोक्ताओं को सस्ते में प्याज मिले. इस मुद्दे पर मीटिंग में चर्चा हो सकती है.
जानकारों ने बताया कि इस बार प्याज के उत्पादन में 9 फीसदी तक गिरावट की आशंका है जिसे लेकर सरकारी स्तर पर अभी से चर्चा तेज हो गई है. हाल के दिनों में कई राज्यों में आंधी, तूफान, बारिश और ओलावृष्टि से प्याज को बहुत नुकसान हुआ है. आगे चलकर अल-नीनो की भी आशंका जताई जा रही है. इन सभी बातों पर मीटिंग में चर्चा हो सकती है.
जानकारों का कहना है कि ईरान युद्ध की वजह से अभी प्याज के दाम भले कम हैं, लेकिन आगे किसानों और निर्यातकों के अच्छे दिन आ सकते हैं. जून में पाकिस्तान में प्याज की फसल निकलेगी जो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जाएगी. उससे पहले भारत के निर्यातकों को फ्री हैंड है कि वे अपनी उपज को दुनिया के मार्केट में बेच सकें. हालांकि ईरान युद्ध के कारण इसमें बाधा आ रही है, मगर दूसरे रूट से प्याज भेजने का मौका अच्छा रहेगा. जून में जब तक पाकिस्तान का प्याज निकलेगा, उससे पहले भारत अपना प्याज बेचकर अच्छा मुनाफा कमा सकता है.
आने वाले समय में भारत के प्याज किसानों को फायदा हो सकता है क्योंकि ईरान प्याज का बड़ा उत्पादक होने के बावजूद लड़ाई की वजह से वह मार्केट से बाहर है. उस कमी को भारत पाट सकता है और कमाई कर सकता है. इस बार बांग्लादेश में भी सरकार बदली है जिससे भारतीय प्याज की खरीद शुरू होने की संभावना बढ़ गई है. 7 अप्रैल को होने वाली बैठक में सरकार और एक्सपोर्टर्स इस बात भी मंथन कर सकते हैं कि ईरान युद्ध के कारण प्याज निर्यात पर कितना असर पड़ा है और इसका समाधान क्या है. इसके अलावा मीटिंग में प्याज एक्सपोर्ट, भंडारण, प्रोक्योरमेंट जैसे मुद्दों पर चर्चा होने के आसार हैं.