
राजस्थान के किशनगढ़ की कृषि उपज मंडी में सोमवार को किसानों ने चक्का जाम कर दिया. यहां किसान गेहूं की एमएसपी पर खरीद नहीं होने और मंडी में बुनियादी सुविधाओं के अभाव से परेशान हैं. किसानों ने व्यापारियों से चने की फसल मनमाने दाम पर खरीदने का भी आरोप लगाया. किसानों के हंगामे के बीच विधायक विकास चौधरी भी मौके पर पहुंचे उन्होंने किसानों की बात सुनी और समाधान निकालने का भरोसा दिलाया.
किसानों का यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब कुछ दिन पहले ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की 100% खरीद सुनिश्चित की जाएगी.
राजस्थान में 2026 के रबी मार्केटिंग सीजन (RMS) के लिए गेहूं की खरीद शुरू हो गई है, जिसका लक्ष्य 23 लाख मीट्रिक टन है. इस खरीद को 2,275 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और 125 रुपये प्रति क्विंटल राजस्थान सरकार की ओर से बोनस दिया जा रहा है. FCI और Rajfed जैसी एजेंसियां गेहूं खरीद प्रक्रिया को चला रही हैं. हालांकि नई स्लॉट-बुकिंग सिस्टम के कारण शुरुआती लॉजिस्टिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जिसके चलते खरीद को सुचारू रूप से चलाने के लिए सुधार की मांग उठने लगी है.
किशनगढ़ मंडी में टैक्टर पर गेहूं लेकर पहुंचे किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया, बाद में जयपुर रोड को भी जाम कर दिया. ट्रैक्टर और ट्रॉली की वजह से हाईवे पूरी तरह से ठप हो गया. मंडी में 'किसान एकता जिंदाबाद' के नारे भी लगाए गए. राजस्थान में इसी हफ्ते गेहूं की खरीद शुरू हुई है, मगर किसानों का आरोप है कि उनकी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदी जा रही है. भारी संख्या में मंडी पहुंचे किसानों ने चक्का जाम कर दिया और अपनी मांग उठाई.
मंडी में किसानों ने आरोप लगाया कि खरीद में मनमानी चल रही है और एक ही माल के अलग-अलग रेट लगाए जा रहे हैं. किसान बलराम चौधरी ने बताया कि दो अलग-अलग ट्रैक्टर में एक तरह का गेहूं मंडी में आया, लेकिन दोनों के दाम अलग लगाए जा रहे हैं. एक का ज्यादा तो दूसरे का कम. उन्होंने बताया कि गेहूं का सही रेट नहीं लगाया जा रहा है और मंडी में धांधली चल रही है.
चने की खरीद को लेकर भी किसानों में रोष है. किशनगढ़ तहसील के किसान साहुल राम ने कहा कि चने का समर्थन मूल्य 5875 रुपये है. लेकिन किसानों को उचित समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है. 5500 रुपये भी नहीं मिल रहा, कम से कम 5200 रुपये दाम तो मिलना ही चाहिए. मंडी में 4700-4800 रुपये क्विंटल का भाव मिल रहा है. मंडी में बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव जिसकी वजह से उपज खराब हो जाती है. मंडी में अनाज सुखाने के लिए प्लेटफॉर्म की भी सुविधा नहीं है.
किसानों ने इन सभी मुद्दों पर सरकार का ध्यान खींचा और जल्द समाधान निकालने की मांग की. किसानों ने गेहूं और चने की समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू करने की अपील की.