हरियाणा में “कच्ची पर्ची” पर रोक, अब हर लेन-देन के लिए J-फॉर्म अनिवार्य

हरियाणा में “कच्ची पर्ची” पर रोक, अब हर लेन-देन के लिए J-फॉर्म अनिवार्य

Haryana State Agricultural Marketing Board ने मंडियों में “कच्ची पर्ची” (अनधिकृत स्लिप) के उपयोग पर सख्त रोक लगा दी है. सभी आढ़तियों को निर्देश दिया गया है कि हर कृषि लेन-देन के लिए J-फॉर्म जारी करना अनिवार्य होगा, ताकि किसानों और खरीदारों को कानूनी रिकॉर्ड मिल सके.

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क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Apr 06, 2026,
  • Updated Apr 06, 2026, 11:30 AM IST

पंचकूला स्थित हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने मंडियों में हो रही अनियमितताओं पर सख्ती दिखाते हुए “कच्ची पर्ची” के उपयोग को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है. बोर्ड को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई आढ़ती खरीद के दौरान अनधिकृत स्लिप का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे किसानों और खरीदारों को लेन-देन का वैध रिकॉर्ड नहीं मिल पाता.

जारी आदेश के अनुसार, इस तरह की प्रथा न केवल नियमों के खिलाफ है बल्कि विवाद की स्थिति में किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य पाने में भी बाधा बनती है. इसलिए अब हर लेन-देन के लिए “J-फॉर्म” जारी करना अनिवार्य कर दिया गया है.

मंडी सचिवों को निर्देश

बोर्ड ने राज्य की सभी मंडी समितियों के सचिवों और ईओ को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्र के आढ़तियों को तुरंत “कच्ची पर्ची” का इस्तेमाल बंद करने के लिए सख्ती से कहें और नियमों का पालन सुनिश्चित करें. यह कदम किसानों के हितों की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है.

“कई शिकायतों के जरिए यह बात सामने आई है कि खरीद के मौसम में कई आढ़तिये लेन-देन के लिए ‘कच्ची पर्चियों’ का इस्तेमाल कर रहे हैं. यह तरीका पूरी तरह से गलत है, क्योंकि इससे किसानों और खरीदारों, दोनों के पास कोई कानूनी रिकॉर्ड नहीं रहता. ऐसे में किसी विवाद की स्थिति में वे अपनी उपज की सही कीमत का दावा नहीं कर पाते,” HSAMB के मुख्य प्रशासक ने राज्य की सभी मार्केट कमेटियों के सचिवों और EOs को भेजे गए एक पत्र में यह बात कही.

आढ़तियों को सख्त चेतावनी

मुख्य प्रशासक ने राज्य की सभी मार्केट कमेटियों के सचिवों-सह-EOs को आगे यह सख्त निर्देश दिया कि वे अपनी-अपनी मार्केट कमेटियों के तहत आने वाले सभी आढ़तियों को तुरंत ‘कच्ची पर्चियों’ जारी करने से रोकें. साथ ही, यह भी सुनिश्चित करें कि तय नियमों के अनुसार, कृषि उपज से जुड़े हर लेन-देन के लिए ‘J’ फॉर्म जारी किया जाए.

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदेश पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देशों के पालन में जारी किया गया है. हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) पर राज्य सरकार को 30 दिनों के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था.

शोषण का शिकार किसान

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर, जिन्होंने यह PIL दायर की थी, ने कहा कि उन्होंने हरियाणा की मंडियों में ‘कच्ची पर्चियों’ के व्यापक इस्तेमाल पर चिंता जताई थी और उन पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की थी.

उन्होंने कहा कि ‘कच्ची पर्ची’ व्यवस्था के कारण अक्सर किसानों को अपनी उपज की कीमत का 30 से 40 प्रतिशत तक नुकसान उठाना पड़ता है, क्योंकि कानूनी दस्तावेजों के अभाव में वे शोषण का शिकार आसानी से बन जाते हैं. ‘J’ फॉर्म का अनिवार्य इस्तेमाल किसानों के हितों की रक्षा करने, लेन-देन का एक पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध कराने और खरीद प्रक्रिया को मजबूत बनाने में सहायक साबित होने की उम्मीद है.

उन्होंने किसानों के हित में उठाए गए इस कदम का स्वागत किया और कहा कि इससे किसान समुदाय को सुरक्षा मिलेगी.

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