Independence Day: ‘सप्तधारा’ से बदलेगी किसानों की किस्मत! खेत से ग्लोबल मार्केट तक का विजन

Independence Day: ‘सप्तधारा’ से बदलेगी किसानों की किस्मत! खेत से ग्लोबल मार्केट तक का विजन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर 'शक्ति की सप्तधारा' का विजन सामने रखा। इसमें कृषि और फूड प्रोसेसिंग को अहम ताकत बताते हुए किसानों को खेत से ग्लोबल मार्केट तक जोड़ने, मिलेट्स, मसाले और चावल को ग्लोबल ब्रांड बनाने पर जोर दिया। साथ ही 1 करोड़ युवाओं को AI ट्रेनिंग और 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य घोषित किया गया।

धर्मेंद्र सिंह
  • Delhi ,
  • Aug 15, 2026,
  • Updated Aug 15, 2026, 9:55 AM IST

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विकास का नया विजन 'शक्ति की सप्तधारा' के रूप में सामने रखा. प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सात शक्तियों के सामर्थ्य से भारत अगले 5 से 7 वर्षों में वह हासिल कर सकता है, जो पिछले 5 से 7 दशकों में नहीं हो सका.

प्रधानमंत्री के इस विजन में किसान, खेती, कृषि उत्पाद और ग्रामीण महिलाएं महत्वपूर्ण केंद्र में रहे.उन्होंने कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग को सप्तधारा की दूसरी शक्ति बताते हुए किसानों को खेत से सीधे वैश्विक बाजार से जोड़ने, कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग बढ़ाने और भारतीय खाद्य उत्पादों को ग्लोबल ब्रांड बनाने पर जोर दिया.

सप्तधारा की सात शक्तियां क्या हैं?

प्रधानमंत्री मोदी ने देश की विकास यात्रा के लिए सात प्रमुख शक्तियों का खाका सामने रखा—

1. मैन्युफैक्चरिंग पावर

2. कृषि और फूड प्रोडक्शन

3. टेक्नोलॉजी और इनोवेशन

4. गति शक्ति और कनेक्टिविटी

5. रक्षा शक्ति

6. ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी

7. भारत की सॉफ्ट पावर

इन सातों धाराओं में कृषि को देश की आर्थिक ताकत बढ़ाने वाली प्रमुख शक्ति के रूप में सामने रखा गया.

दूसरी धारा में किसान और खेती पर सबसे ज्यादा जोर

प्रधानमंत्री ने सप्तधारा की दूसरी शक्ति कृषि और फूड प्रोडक्शन को बताया. उन्होंने कहा कि अब भारत के किसानों के लिए दुनिया के बाजार खुले हैं और जरूरत है कि भारतीय कृषि उत्पादों को खेत से निकालकर सीधे वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जाए.

उन्होंने फूड प्रोसेसिंग को कृषि की आय और बाजार दोनों बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया.प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पारंपरिक खान-पान, मिलेट्स, मसाले, चावल और दूसरे कृषि उत्पादों में दुनिया के बाजारों के लिए बड़ी संभावनाएं हैं.

अब लक्ष्य केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्पादन से प्रोसेसिंग और प्रोसेसिंग से एक्सपोर्ट तक पूरी वैल्यू चेन भारत में विकसित करने पर जोर रहेगा.

खेत से एक्सपोर्ट मार्केट तक पहुंचेगा किसान

प्रधानमंत्री के भाषण का सबसे महत्वपूर्ण कृषि संदेश यह रहा कि किसान को केवल स्थानीय मंडी तक सीमित नहीं रहना चाहिए.

खेत → प्रोसेसिंग → पैकेजिंग → ब्रांडिंग → एक्सपोर्ट

इस पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करके भारतीय कृषि उत्पादों को दुनिया के बाजार तक पहुंचाने की जरूरत है.प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के कृषि उत्पाद अगर वैश्विक मानकों पर खरे उतरते हैं तो उनके लिए दुनिया में बड़ा बाजार तैयार हो सकता है.

केमिकल-फ्री खेती और ग्लोबल मार्केट पर जोर

प्रधानमंत्री ने किसानों को केमिकल-फ्री खेती की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसे कृषि उत्पादों की मांग बढ़ने वाली है.

उनके मुताबिक, अगर भारत के एग्रो प्रोडक्ट वैश्विक गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को पूरा करते हैं तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचाना आसान होगा.इसका सीधा फायदा किसानों को मिल सकता है, क्योंकि कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग बढ़ने से उन्हें नए बाजार और बेहतर मूल्य मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी.

मिलेट्स, मसाले और चावल बनेंगे ग्लोबल ब्रांड

भारत की पारंपरिक कृषि और खान-पान को दुनिया तक पहुंचाने पर भी प्रधानमंत्री ने जोर दिया.उन्होंने मिलेट्स, मसाले, चावल और दूसरे भारतीय खाद्य उत्पादों को ग्लोबल ब्रांड बनाने की जरूरत बताई.यानी आने वाले समय में किसान की भूमिका केवल फसल पैदा करने वाले उत्पादक तक सीमित नहीं होगी, बल्कि वह ग्लोबल फूड वैल्यू चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है.

पहली धारा से भी जुड़े किसान

सप्तधारा की पहली शक्ति मैन्युफैक्चरिंग है. कृषि के नजरिए से इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि खेती के लिए जरूरी मशीनरी, उपकरण, कंपोनेंट और प्रोसेसिंग से जुड़े उपकरण देश में बनने से कृषि क्षेत्र को फायदा मिल सकता है.ट्रैक्टर, कृषि मशीनरी, सिंचाई उपकरण, ड्रोन, पोस्ट-हार्वेस्ट मशीनरी और फूड प्रोसेसिंग उपकरणों की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ने से किसानों को तकनीक और उपकरणों की उपलब्धता मजबूत हो सकती है.

तीसरी धारा: AI और टेक्नोलॉजी से बदलेगी खेती

सप्तधारा की तीसरी शक्ति टेक्नोलॉजी और इनोवेशन है.प्रधानमंत्री ने AI, क्वांटम, स्पेस, रोबोटिक्स और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में भारत को इनोवेशन हब बनाने की बात कही.

इसका असर कृषि क्षेत्र में भी देखने को मिल सकता है.AI आधारित मौसम पूर्वानुमान, फसल रोगों की पहचान, स्मार्ट सिंचाई, ड्रोन, सटीक खेती और डिजिटल कृषि जैसी तकनीकें किसानों की उत्पादकता और लागत प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.प्रधानमंत्री ने इसी कड़ी में देश के 1 करोड़ युवाओं को AI ट्रेनिंग देने की घोषणा भी की.

चौथी धारा: किसान के लिए बेहतर कनेक्टिविटी

सप्तधारा की चौथी शक्ति गति शक्ति है। प्रधानमंत्री ने हाई-स्पीड रेल, आधुनिक हाईवे, एयरपोर्ट, इनलैंड वाटरवेज और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स का नेटवर्क मजबूत करने की बात कही.

कृषि के नजरिए से बेहतर कनेक्टिविटी का मतलब है कि किसान की उपज खेत से मंडी और मंडी से प्रोसेसिंग सेंटर या बंदरगाह तक तेजी से पहुंच सके.

खासकर फल, सब्जी, फूल, दूध और अन्य जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों के लिए बेहतर लॉजिस्टिक्स किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

पांचवीं धारा: रक्षा के साथ कृषि मशीनरी में आत्मनिर्भरता

सप्तधारा की पांचवीं शक्ति रक्षा शक्ति है। प्रधानमंत्री ने भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और अगली पीढ़ी की तकनीक विकसित करने पर जोर दिया.हालांकि यह सीधे कृषि क्षेत्र से जुड़ा विषय नहीं है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी आत्मनिर्भरता का व्यापक फायदा देश के दूसरे क्षेत्रों के साथ कृषि मशीनरी और तकनीकी उपकरणों को भी मिल सकता है.

छठी धारा: ग्रीन इकोनॉमी और किसान

प्रधानमंत्री ने छठी शक्ति के रूप में ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी को रखा. ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन मोबिलिटी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दिया गया.कृषि के लिए इसका महत्व सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई, कृषि अपशिष्ट से ऊर्जा, बायोफ्यूल और पर्यावरण-अनुकूल खेती जैसी गतिविधियों से जुड़ता है.

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ग्रीन इकोनॉमी ग्रीन जॉब्स को जन्म देगी, जिससे ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं.

सातवीं धारा: भारत की सॉफ्ट पावर से किसानों को भी मौका

सप्तधारा की सातवीं शक्ति भारत की सॉफ्ट पावर है. प्रधानमंत्री ने योग, आयुर्वेद, आस्था और होलिस्टिक हेल्थकेयर को भारत की वैश्विक ताकत बताया.कृषि के नजरिए से यह क्षेत्र भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आयुर्वेदिक उत्पादों, औषधीय पौधों, पारंपरिक खाद्य पदार्थों और प्राकृतिक उत्पादों की वैश्विक मांग भारतीय किसानों के लिए नए बाजार तैयार कर सकती है.

किसानों के साथ ग्रामीण महिलाओं पर भी बड़ा फोकस

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को भी विकास की इस व्यापक तस्वीर से जोड़ा.उन्होंने कहा कि पहले देश ने 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा था, जिसे सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। अब सरकार ने 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का नया लक्ष्य रखा है.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को देखते हुए यह लक्ष्य कृषि और गांवों की आय बढ़ाने से भी जुड़ा है. स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाएं कृषि आधारित कारोबार, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, पशुपालन, हस्तशिल्प और छोटे उद्यमों से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ा सकती हैं.

किसान से ग्लोबल ब्रांड तक का नया विजन

प्रधानमंत्री मोदी के 'शक्ति की सप्तधारा' विजन में कृषि को सिर्फ खाद्यान्न उत्पादन के रूप में नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन इकोनॉमी और ग्लोबल ट्रेड से जोड़कर देखने का संदेश दिया गया है.

अगर इस विजन को कृषि क्षेत्र के संदर्भ में देखें तो इसका लक्ष्य स्पष्ट है—किसान खेत में उत्पादन करे, देश में उसकी प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग हो और वही उत्पाद दुनिया के बाजार तक पहुंचे.यानी आने वाले वर्षों में भारत की कृषि नीति का फोकस केवल ज्यादा उत्पादन पर नहीं, बल्कि बेहतर गुणवत्ता, वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और एक्सपोर्ट पर भी बढ़ सकता है.

प्रधानमंत्री ने इसी पूरी दिशा के लिए "क्वालिटी, क्वालिटी, क्वालिटी" का मंत्र दिया और भारत को दुनिया के लिए भरोसेमंद उत्पादन एवं इनोवेशन केंद्र बनाने का आह्वान किया.

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