खरीफ के मौसम में खेती होगी और मजबूत, किसानों के लिए कृषि मंत्रालय का एक्शन प्लान!

खरीफ के मौसम में खेती होगी और मजबूत, किसानों के लिए कृषि मंत्रालय का एक्शन प्लान!

नई दिल्ली के पूसा परिसर में दो दिवसीय 'राष्ट्रीय खरीफ अभियान-2026' का आयोजन किया गया. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ किया कि सरकार की सबसे बड़ी तरजीह (प्राथमिकता) देश में खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना, हर नागरिक को पोषण देना और किसानों की आमदनी बढ़ाना है. इस बैठक में देशभर के कृषि मंत्री, वैज्ञानिक और सीनियर अफसर शामिल हुए, ताकि खरीफ सीजन के लिए मजबूत प्लानिंग की जा सके और छोटे किसानों तक नई तकनीक और उम्दा बीज पहुंच सकें. मंत्री जी ने जोर दिया कि हर राज्य का मौसम और जमीन अलग है, इसलिए अब नेशनल के साथ-साथ रीजनल कॉन्फ्रेंस भी की जा रही है, ताकि हर इलाके की जमीनी दिक्कतों का सही हल निकाला जा सके.

Kharif Sammelan 2026 ShivrajKharif Sammelan 2026 Shivraj
क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • May 29, 2026,
  • Updated May 29, 2026, 11:16 AM IST

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली के पूसा परिसर में 'राष्ट्रीय खरीफ अभियान-2026' कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया के साथियों से एक बेहद अहम बातचीत की. उन्होंने बिल्कुल साफ लफ्जों में यह बात कही कि इस वक्त हमारे मुल्क की सबसे बड़ी जरूरत फूड सिक्योरिटी को पूरी तरह मजबूत बनाना है. इसके साथ ही, रात-दिन खेतों में पसीना बहाने वाले हमारे देश के करोड़ों किसानों की माली हालत और उनकी आमदनी को पहले से कहीं ज्यादा बेहतर करना सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है.

सरकार का पूरा इरादा है कि हर हिंदुस्तानी भाई-बहन को पूरा पोषण और सेहत से भरपूर खाना आसानी से मिल सके. इसी सिलसिले में 28 और 29 मई 2026 को हो रहे इस दो दिन के बहुत बड़े जलसे में देशभर के कृषि मंत्री, बड़े-बड़े वैज्ञानिक और सीनियर अफसर एक साथ मिलकर जुटे हैं. इस खास कांफ्रेंस का असली और इकलौता मकसद खरीफ के इस नए सीजन के लिए एक बेहतरीन और मजबूत प्लानिंग तैयार करना है, ताकि देश के कोने-कोने में बैठे छोटे से छोटे किसानों को भी बिल्कुल सही वक्त पर खेती की नई तकनीक, उम्दा बीज और पूरी सरकारी मदद मिल सके.

राज्यों के साथ मिलकर काम करने की नई शुरुआत

कृषि मंत्री ने कहा कि खेती-किसानी में कामयाबी तभी मुमकिन है जब केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर एक टीम की तरह काम करें. चूंकि हमारे मुल्क में हर राज्य  का मौसम, पानी और जमीन अलग है, इसलिए इस बार सिर्फ एक नेशनल कांफ्रेंस नहीं की जा रही, बल्कि रीजनल कॉन्फ्रेंसों का सिलसिला भी शुरू किया गया है. जयपुर, लखनऊ और भुवनेश्वर में ऐसी बैठकें हो चुकी हैं, और जल्द ही नॉर्थ-ईस्ट और साउथ इंडिया में भी ये मीटिंग्स होंगी. इसके अलावा, देश को आठ 'एग्रो-क्लाइमेटिक जोन'  में बांटकर चर्चा करने का इरादा है, ताकि हर इलाके की खास दिक्कतों को समझकर जमीनी स्तर पर उनका सही हल निकाला जा सके.

किसानों की लगन से पैदावार में नया रिकॉर्ड

देश के किसानों की कड़ी मेहनत और वैज्ञानिकों की नई रिसर्च की बदौलत इस साल भारत ने अनाज के उत्पादन के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं. साल 2025-26 में कुल अनाज उत्पादन करीब 3,765 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 188 lakh टन ज्यादा है. सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि चावल की पैदावार में भारत ने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है और 1,540 लाख टन के साथ अब दुनिया में नंबर-1 बन गया है. इसके साथ ही गेहूं और मक्के की फसलों ने भी रिकॉर्ड तोड़ पैदावार दर्ज की है, जो मुल्क के लिए बेहद गर्व की बात है.

तिलहन-दलहन और बागवानी को बढ़ावा 

अनाज के अलावा तेल और दालों तिलहन और दलहन की पैदावार बढ़ाने के लिए सरकार ने खास मिशन तैयार किए हैं. इस साल तिलहन का उत्पादन भी करीब 430 लाख टन होने की उम्मीद है, जिसमें सरसों और मूंगफली ने नया रिकॉर्ड बनाया है. कृषि मंत्री ने बताया कि बागवानीऔर कपास (कॉटन) की खेती में भी तरक्की की अपार संभावनाएं हैं, जिस पर सरकार का पूरा फोकस है. इस पूरी मुहिम का मकसद यह है कि देश को हर तरह की फसल के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जा सके और किसानों को उनकी फसलों का वाजिब दाम मिले.

किसानों की माली हालत सुधारने का रोडमैप

आज के दौर में क्लाइमेट चेंज, बेवक्त की बारिश और बढ़ती गर्मी खेती के लिए एक बहुत बड़ा चैलेंज बन चुके हैं. इस मुश्किल से निपटने के लिए सम्मेलन में नेचुरल फार्मिंग, सॉइल हेल्थ कार्ड और उर्वरकों के सही इस्तेमाल पर जोर दिया गया. इसके साथ ही, छोटे और गरीब किसानों की माली हालत को सुधारने के लिए 'इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल' और एग्री इंफ्रा फंड पर चर्चा हुई. सरकार का मकसद हर किसान को डिजिटल आईडी और किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए आसानी से कर्ज दिलाना है, ताकि देश की खेती और 'खेत' दोनों को सुरक्षित रखा जा सके.

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