Cotton Import Duty: कपास की इंपोर्ट ड्यूटी पर छूट आगे ना बढ़ाए सरकार, भारतीय किसान संघ ने सरकार से किया आग्रह

Cotton Import Duty: कपास की इंपोर्ट ड्यूटी पर छूट आगे ना बढ़ाए सरकार, भारतीय किसान संघ ने सरकार से किया आग्रह

Cotton Import Duty: हाल ही में कपास पर इंपोर्ट ड्यूटी की छूट को भारत सरकार ने अब 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया है. इसको लेकर भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने केंद्र सरकार से इस फैसले को वापस लेने का आग्रह किया है. बीकेएस का कहना है कि इस कदम से घरेलू किसानों को नुकसान हो रहा है और भारत आयात पर निर्भरता की ओर बढ़ सकता है.

कपास की फसल बर्बादकपास की फसल बर्बाद
क‍िसान तक
  • नोएडा,
  • Aug 30, 2025,
  • Updated Aug 30, 2025, 5:48 PM IST

भारतीय किसान संघ (BKS) ने केंद्र सरकार से कपास की इंपोर्ट ड्यूटी पर छूट को 31 दिसंबर तक बढ़ाने के अपने फैसले को वापस लेने का आग्रह किया है. साथ ही, चेतावनी दी है कि इस कदम से घरेलू किसानों को नुकसान हो सकता है और भारत आयात पर निर्भरता की ओर बढ़ सकता है. BKS ने यह अपील वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखे एक पत्र में की है.

कपास का आयातक बन सकता है भारत

वित्त मंत्री को लिखे इस पत्र के अनुसार, भारतीय कपास संघ (बीकेएस) ने बताया कि भारत का कपास उत्पादन लगभग 320 लाख गांठ है, जबकि घरेलू मांग लगभग 391 लाख गांठ है. भारत में कपास की एक मानक गांठ का वजन लगभग 170 किलोग्राम होता है. मिलों का अनुमान है कि आमतौर पर हर साल लगभग 60-70 लाख गांठें आयात की जाती हैं, जो देश के कुल कपास उपयोग का लगभग 12 प्रतिशत है.

किसान संगठन ने कहा कि इस साल कपास की खेती का रकबा पिछले साल की तुलना में 3.2 प्रतिशत कम हुआ है. भारतीय कपास संघ ने पत्र में चेतावनी दी है कि अगर घरेलू कपास बीज की उपलब्धता नहीं बढ़ी, तो भारत कपास का निर्यातक होने के बजाय आयातक देश बन जाएगा.

कपास किसानों पर ये बड़ा संकट

इस पत्र में कहा गया है कि घोषणा के बाद कपास की कीमतें पहले ही 7,000 रुपये प्रति क्विंटल से गिरकर 6,000 रुपये प्रति क्विंटल पर आ चुकी हैं, और अगर दिसंबर तक शुल्क-मुक्त आयात जारी रहा, तो कपास की कीमतें और गिर सकती हैं. भारतीय किसान संघ ने पत्र में सवाल किया कि अगर कपास का आयात सिर्फ़ 2,000 रुपये प्रति क्विंटल पर होता है, तो कोई हमारे किसानों से 5,000 रुपये प्रति क्विंटल पर कपास क्यों खरीदेगा? वित्त मंत्रालय ने शुरुआत में 11 अगस्त से 30 सितंबर, 2025 तक कपास आयात शुल्क पर छूट दी थी. हालांकि, हालिया फैसले ने इस छूट को दिसंबर के अंत तक बढ़ा दिया है.

फैसले पर पुनर्विचार करे सरकार

भारतीय किसान संघ के महासचिव मोहन मित्रा ने इसमें जोर देकर कहा कि सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए. उन्होंने वित्त मंत्री को संबोधित पत्र में लिखा कि अगर सरकार कपास आयात पर छूट के इस फैसले को नहीं रोकती, तो भारत आत्मनिर्भर होने के बजाय कपास क्षेत्र में विदेशियों पर निर्भर हो जाएगा. पत्र के अंत में अधिसूचना को तुरंत वापस लेने की अपील की गई, जिसमें कहा गया कि घरेलू कपास के बेहतर दाम सुनिश्चित करने से किसानों को प्रोत्साहन मिलेगा और इस क्षेत्र को निर्भरता में जाने से बचाया जा सकेगा. पत्र की एक प्रति केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी भेजी गई.

(सोर्स- ANI)

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