एक जमाना वो था जब लोग बिना किसी तकनीक या मशीन के बारिश की सटीक जानकारी दे देते थे. लोक कहावतों और कविताओं में बता देते थे कि बारिश होने या नहीं होने के क्या संकेत हैं. ऐसे दूरदर्शी लोगों में एक नाम है घाघ (Mahakavi Ghagh) का जिन्हें कृषि पंडित भी कहा जाता है. एक नाम है भड्डुरी और एक नया नाम हमें पता चला पांच पांडवों में से एक सहदेव का. ये लोग कहावतों की चंद लाइनों में बता देते थे कि आपके गांव-देहात या नगर में कब बारिश होगी. वे बता देते थे कि हालात सामान्य न रहे तो बारिश के लिए लोग तरस जाएंगे. किसान तक के साथ बुलंदशहर के एक गांव (Bulandshehar Village) में सजी मानसून चौपाल (Monsoon Chaupal)