
इस साल मॉनसून को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) ने अपने लॉन्गटर्म मॉनसून आउटलुक में कहा है कि 2026 में बारिश सामान्य से कम, यानी करीब 92 प्रतिशत (+/- 5 प्रतिशत) रह सकती है. हालांकि, मौसम के ऐसे अनुमान कई बार बदल भी जाते हैं, इसलिए अभी पूरी स्थिति साफ नहीं है. मौसम के अनुमान हमेशा सही नहीं होते. साल 2002 में ज्यादा बारिश का अनुमान था, लेकिन असल में बारिश काफी कम हुई. 2009 में भी ऐसा ही हुआ. वहीं 2007 और 2019 जैसे सालों में उम्मीद से ज्यादा बारिश हुई. इसका मतलब यह है कि सिर्फ कुल बारिश ही नहीं, बल्कि कब और कितनी बारिश होती है, यह ज्यादा जरूरी होता है.
कम या कमजोर बारिश का सबसे पहले असर खाने-पीने की चीजों पर पड़ता है. धान, दाल, तिलहन और सब्जियां बारिश पर काफी निर्भर होती हैं. अगर जुलाई और अगस्त में बारिश कम रही तो बुवाई और पैदावार दोनों प्रभावित होते हैं. इससे बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं.
मौसम विभाग के अनुसार, इस साल अल नीनो बनने की भी आशंका है. आमतौर पर अल नीनो के दौरान भारत में बारिश कमजोर या असमान रहती है. इससे खेती पर असर पड़ता है और महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है.
दूसरी तरफ वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव पर भी नजर है. अगर हालात बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल के दाम बढ़ सकते हैं. भारत में तेल महंगा होने का मतलब है ट्रांसपोर्ट और खेती की लागत बढ़ना. इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है.
अगर मॉनसून देर से आता है या शुरुआत में कमजोर रहता है तो बाद में अच्छी बारिश भी पूरी भरपाई नहीं कर पाती. पहले भी ऐसे साल देखे गए हैं, जब कुल बारिश ठीक रही, लेकिन तब भी फसल को नुकसान हुआ. हालांकि, पिछले दो साल अच्छी बारिश होने से जलाशयों में पानी का स्तर ठीक है. इससे खेती को शुरुआत में मदद मिल सकती है. साथ ही इंडियन ओशन डाइपोल के बाद में सकारात्मक होने की संभावना है, जिससे बारिश को सहारा मिल सकता है.
अब आने वाले समय में मॉनसून कैसा रहता है, अल नीनो कितना असर डालता है और दुनिया के हालात कैसे रहते हैं, इन सब फैक्टर्स पर आगे महंगाई दर निर्भर करेगी. आने वाले कुछ महीने इस लिहाज से बहुत अहम रहने वाले हैं. फिलहाल देश में महंगाई काबू में है. मार्च में खुदरा महंगाई 3.4 प्रतिशत रही, जो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के तय लक्ष्य 4 प्रतिशत से कम है. लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में यह 5 से 6 प्रतिशत तक जा सकती है. (पीयूष अग्रवाल की रिपोर्ट)