
ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध का असर अब कपड़ा उद्योग पर भी साफ दिखने लगा है. कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से पॉलिएस्टर जैसे मानव-निर्मित फाइबर (MMF) महंगे हो गए हैं, जिससे कपास की मांग फिर से बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है. जानकारी के मुताबिक, कच्चे तेल के महंगा होने के कुछ ही दिनों में पॉलिएस्टर फाइबर की कीमतों में 10 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है. इसका सीधा फायदा कपास किसानों को मिल सकता है, क्योंकि अब मिलों के लिए पॉलिएस्टर की जगह कॉटन इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के अध्यक्ष अध्यक्ष विनय एन. कोटक का कहना है कि पहले जो मिलें पॉलिएस्टर की तरफ चली गई थीं, अब वे दोबारा कपास की ओर लौट सकती हैं. इसी वजह से चालू सीजन 2025-26 में कपास की खपत पहले के अनुमान से करीब 10 लाख गांठ ज्यादा रहने की उम्मीद है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कपास के दाम बढ़े हैं. डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से आयात महंगा हो गया है, जिससे घरेलू कपास की मांग और बढ़ सकती है.
बाजार में तेजी को देखते हुए कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CCI) ने भी हाल ही में कपास की कीमतों में बढ़ोतरी की है. CCI ने कुछ ही दिनों में तीन बार दाम बढ़ाकर कुल 1,400 प्रति कैंडी (356 किलो) तक बढ़ा दिए हैं. CCI के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, ललित कुमार गुप्ता के अनुसार, यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय रुझान के हिसाब से की गई है और बाजार में मांग अच्छी बनी हुई है.
इस बीच वैश्विक सप्लाई चेन में रुकावट के कारण भारत से सूती धागे की मांग भी बढ़ रही है. खासतौर पर चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से ऑर्डर बढ़े हैं. हालांकि, बाजार में अभी भी थोड़ी अनिश्चितता बनी हुई है. ऐसे में व्यापारी और मिल मालिक भी बड़ी खरीदारी से बच रहे हैं और जरूरत के हिसाब से ही कपास खरीद रहे हैं.
वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि कपास और पॉलिएस्टर के बीच संतुलन काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा. अगर तेल महंगा रहता है, तो कपास की मांग और बढ़ सकती है. बता दें कि, पिछले कुछ वर्षों में कपास को पॉलिएस्टर जैसे सस्ते विकल्पों से कड़ी टक्कर मिल रही थी. इंटरनेशनल कॉटन एडवाइजरी काउंसिल (ICAC) के अनुसार, दुनिया में कपास की हिस्सेदारी 40 फीसदी से घट कर 25 फीसदी से नीचे आ गई थी. लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए अब कपास के लिए फिर से अच्छा समय आने की उम्मीद जताई जा रही है.