
लगातार कई महीनों से दालों की महंगाई दर दोहरे अंक से नीचे आने का नाम नहीं ले रही है. हालांकि, जून में दालों की महंगाई दर में 1 फीसदी की गिरावट देखी गई है. दालों की कीमतों को और नीचे लाने के लिए उपभोक्ता मामले विभाग बड़े विक्रेताओं के स्टॉक का आकलन कर रहा है. ताकि, जमाखोरी को रोका जा सके और तय स्टॉक लिमिट मानक का पालन कराया जा सके. इससे पहले रिलायंस रिटेल, डीमार्ट जैसी निजी कंपनियों को खुदरा कीमतें नीचे रखने को कहा गया है.
बढ़ते आयात के कारण प्रमुख दालों तुअर, उड़द और चना की मंडी कीमतों में गिरावट के साथ सरकार वर्तमान में बड़े खुदरा विक्रेताओं के पास स्टॉक की उपलब्धता का आकलन कर रही है ताकि कीमतों में नरमी का लाभ उपभोक्ताओं को दिलाया जा सके. रिपोर्ट के अनुसार उपभोक्ता मामलों के विभाग थोक विक्रेताओं, आयातकों और खुदरा विक्रेताओं के पास रखी दालों की निगरानी कर रहे है. क्योंकि दालों के आयात ने घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ा दी है. कहा गया कि थोक कीमतों में नरमी के बाद अगर जल्दी ही खुदरा कीमतों में कमी नहीं दिखाई देती है तो विक्रेताओं पर कार्रवाई शुरू की जाएगी.
बीते मंगलवार को उपभोक्ता मामले विभाग और निजी फर्मों जैसे रिलायंस रिटेल, डी मार्ट, टाटा स्टोर्स और स्पेंसर सहित दूसरे बड़े विक्रेताओं के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. विभाग ने निजी फर्मों से कहा कि प्रमुख मंडियों में चना, अरहर और उड़द की जुलाई कीमतों में जून महीने की कीमतों की तुलना में लगभग 4 फीसदी की गिरावट आई है. लेकिन यह गिरावट खुदरा कीमतों में नहीं देखी गई है.
थोक मंडी कीमतों और खुदरा कीमतों के बीच अलग-अलग रुझान यह इशारा करते हैं कि खुदरा विक्रेताओं को अधिक प्रॉफिट मार्जिन मिल रहा है. कहा गया कि बड़े चेन खुदरा विक्रेताओं सहित सभी स्टॉकहोल्डिंग संस्थाओं की स्टॉक स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है ताकि तय स्टॉक लिमिट का उल्लंघन न हो. स्टॉक लिमिट का उल्लंघन, बेईमानी से सट्टेबाजी और फर्मों की ओर से मुनाफाखोरी करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. पिछले महीने ही सरकार ने 30 सितंबर तक अरहर और चना पर स्टॉक होल्डिंग लिमिट लागू की है.
अप्रैल में उपभोक्ता मामलों के विभाग ने कहा था कि व्यापारियों, आयातकों, मिल मालिकों और स्टॉक को 15 अप्रैल से दालों के अपने स्टॉक की घोषणा करनी होगी. उसे संदेह था कि आयातित दालों की पर्याप्त मात्रा सीमा शुल्क गोदामों में पड़ी है. पिछले महीने दालों और प्रोडक्ट कैटेगरी महंगाई सालाना आधार पर 16.07 फीसदी तक बढ़ गई और पिछले एक साल से दोहरे अंकों में बढ़ रही थी. जून में दालों की अरहर किस्म की कीमतों में सबसे अधिक 26.86 फीसदी की तेजी दर्ज की गई. पिछले महीने चना दाल 18.49 फीसदी और मूंग की कीमतों में 8.44 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है.
कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में पर्याप्त मानसूनी बारिश के कारण खरीफ दालों अरहर, उड़द और मूंग की बुवाई मजबूत रही है. कृषि मंत्रालय के अनुसार खरीफ बुवाई सीजन के लिए अरहर, उड़द और मूंग जैसी दालों का रकबा सालाना आधार पर 26 फीसदी बढ़कर 62.3 लाख हेक्टेयर हो गया. माना जा रहा है कि 2024-25 सीजन में दालों का अधिक उत्पादन होगा.