
पीतल की घंटियों और घुंघरुओं की झनकार के साथ अपनी ऐतिहासिक और समृद्ध विरासत को संजोए जिला एटा में किसान तक का किसान कारवां अपने सातवें पड़ाव के दौरान सुल्तानपुर गांव पहुंचा. खेतों में मौसमी सब्जियों के साथ रबी फसलों के रूप में गेहूं और सरसों की लहलहाती फसलों के साथ खरीफ में धान सहित अन्य फसल इस जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हुए इसे कृषि प्रधान जनपद बनाती है. जिले की आबादी का एक बड़ा हिस्सा कृषि के सहारे अपनी खुशहाली का सफल मुकाम हासिल कर रहा है और इसमें सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएं उनकी आय को दोगुना करने का सशक्त और समृद्ध माध्यम बन रही हैं.
वहीं, बदलते दौर के साथ किसानों तक खेती की नई तकनीक, सरकार की नई योजनाओं और खेतों में उर्वरकों के सही उपयोग की पूरी जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से किसान तक का किसान कारवां राज्य के 75 जिलों के कवरेज के क्रम में एटा जिले में पहुंचा. जहां काफी संख्या में ग्रामीण किसान पहुंचे. वहीं, किसान कारवां कार्यक्रम में आए कृषि वैज्ञानिक,कृषि और पशुपालन से जुड़े अधिकारियों सहित इफको और चंबल फर्टिलाइजर के प्रतिनिधियों द्वारा किसानों को खेती से जुड़ी जानकारी दिया गया. वहीं, लकी ड्रा के जरिए कार्यक्रम में आए 10 किसानों की 500 तो दूसरे विजेता को 2000 और पहले विजेता को 3000 रुपये की राशि दी गई.
पहले चरण में कृषि विभाग के एडीओ जितेंद्र कुमार ने सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे कृषि यंत्रों की जानकारी किसानों को दी.उन्होंने बताया कि जिन किसानों को कृषि यंत्रों की आवश्यकता है, वे आवेदन प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. इस दौरान मटर, टमाटर सहित सब्जियों की खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई. साथ ही घाघ की कहावतों के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक और अग्रिम खेती के प्रति जागरूक किया गया. उन्होंने ट्राइकोडर्मा दवा के सही उपयोग की विधि बताते हुए कहा कि इसकी कीमत 100 रुपये है, जिस पर 75 प्रतिशत तक सब्सिडी दिया जा रहा है. इसके अलावा ड्रोन के माध्यम से दवा और उर्वरक के छिड़काव की सही तकनीक और ड्रोन गांवों तक कैसे उपलब्ध होंगे, इसकी भी जानकारी दी गई.
दूसरे चरण में चंबल फर्टिलाइजर के एरिया मैनेजर भूपेंद्र राणा सिंह ने कंपनी के उत्पादों और किसानों को उर्वरकों के माध्यम से दी जा रही सहायता की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने किसानों से मिट्टी की जांच कराने की अपील की और कंपनी द्वारा उपलब्ध मिट्टी जांच सुविधा के बारे में बताया. साथ ही उत्तम प्रमाण बीजों के शोधन, उनके उपयोग और अलग-अलग चरणों पर विस्तार से जानकारी साझा की.
तीसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र, एटा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनीष कुमार सिंह ने पराली प्रबंधन, प्राकृतिक खेती और गोबर के सही उपयोग पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि पुरानी और पारंपरिक तकनीकों को अपनाकर गोबर खाद का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है. इसके साथ ही देसी गाय के माध्यम से प्राकृतिक खेती, जीवामृत और घनामृत के उपयोग और सरकार की अलग-अलग योजनाओं की जानकारी किसानों को दी गई.
चौथे चरण में मैजिशियन सलमान ने अपने जादुई अंदाज में किसान तक के किसान कारवां के संदेशों को किसानों तक पहुंचाया. उन्होंने मुथूट फाइनेंस के माध्यम से किसानों को खेती के लिए आसानी से लोन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया समझाई. साथ ही चंबल फर्टिलाइजर के उत्पादों को भी रोचक तरीके से प्रस्तुत किया.
पांचवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक नीरज सिंह ने किसानों को यह बताया कि कौन-सी खेती उनके लिए अधिक लाभकारी हो सकती है. उन्होंने पोषण वाटिका के सही उपयोग और इसकी खेती की विधि पर जानकारी दी. साथ ही सब्जी की खेती के साथ मेड़ों पर फलदार पौधे लगाने की सलाह दी और किसानों से अपील की कि वे अपने बच्चों के लिए उपजाऊ मिट्टी और फलदार वृक्ष छोड़कर जाएं. इसके अलावा अनाजों के वैल्यू एडिशन पर काम करने की आवश्यकता बताते हुए केवीके द्वारा दिए जाने वाले प्रशिक्षण की जानकारी भी दी.
छठे चरण में केवीके एटा के डॉ. शिव प्रताप ने किसानों को आय दोगुनी करने के उपाय बताए. उन्होंने पशुपालन के माध्यम से आमदनी बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की. साथ ही ठंड के मौसम में सब्जियों में लगने वाले रोगों और पाले से बचाव के उपायों की जानकारी साझा की.
सातवें चरण में कार्यक्रम में शामिल अतिथियों का सम्मान किया गया और लकी ड्रा के तहत विजेताओं की घोषणा की गई. 500 रुपये के दस पुरस्कार धर्मेंद्र, तोड़ी लाल, वीरेंद्र, हरवेंद्र, देवजीत, कुंवर पाल, मुकेश कुमार, पिंकू, प्रवीण और हेमराज को दिए गए. दूसरे पुरस्कार के रूप में 2,000 रुपये की राशि विपिन कुमार को मिली, जबकि प्रथम पुरस्कार के रूप में 3,000 रुपये की राशि जगनेश कुमार को दी गई. कार्यक्रम के अंत में एटा जिले के किसान नई जानकारियों और मुस्कान के साथ अपने घरों की ओर रवाना हुए.
किसान कारवां यह कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक लंबी और सार्थक यात्रा है, जो 29 दिसंबर 2025 से शुरू होकर मई 2026 के अंत तक प्रदेश भर के सभी 75 जिलों तक पहुंचेगी. किसान तक का किसान कारवां यूपी के हर जिले में पहुंचकर किसानों, ग्राम प्रधानों, प्रगतिशील किसानों और महिला किसानों को एक साझा मंच देगा. यहां खेती से जुड़ी नवीनतम तकनीकों की जानकारी मिलेगी, सरकारी योजनाओं को सरल भाषा में समझाया जाएगा और उन सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं पर चर्चा होगी, जो आज के समय में किसानों के लिए वास्तव में उपयोगी हैं.
हमारे इस किसान कारवां में हर पड़ाव पर होंगे विशेषज्ञों के व्याख्यान, आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों की प्रदर्शनियां, प्रशिक्षण सत्र और किसान गोष्ठियां. साथ ही, उन प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने नवाचार, मेहनत और समझदारी से खेती को एक नई दिशा दी है. किसानों के लिए यह मंच अनुभव साझा करने का भी होगा और सीखने का भी.
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. किसान कारवां क्या है?
किसानों से सीधे जुड़ने वाला किसान तक का विशेष कृषि अभियान.
2. किसान कारवां का उद्देश्य क्या है?
किसानों की समस्याएं, समाधान और नई जानकारी सामने लाना.
3. किसान कारवां किन जगहों पर हो रहा है?
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में.
4. किसान कारवां किन किसानों के लिए है?
छोटे, सीमांत, युवा, महिला और प्रगतिशील किसान-सभी के लिए.
5. किसान कारवां में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?
खेती, लागत घटाने के तरीके, तकनीक और योजनाओं की जानकारी.
6. क्या किसान अपनी समस्या सीधे बता सकते हैं?
हां, किसान अपनी बात सीधे मंच पर रख सकते हैं.
7. क्या इसमें भाग लेने के लिए शुल्क है?
नहीं, किसानों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है.
8. किसान कारवां की जानकारी कहां मिलेगी?
किसान तक के सोशल मीडिया हैंडल और यूट्यूब चैनल https://www.youtube.com/@kisantakofficial पर