देश की सबसे लंबी वाटर टनल तैयार! विंध्‍य क्षेत्र पहुंचेगा नर्मदा का पानी, इतने लाख हेक्‍टेयर जमीन में होगी सिंचाई

देश की सबसे लंबी वाटर टनल तैयार! विंध्‍य क्षेत्र पहुंचेगा नर्मदा का पानी, इतने लाख हेक्‍टेयर जमीन में होगी सिंचाई

कटनी के स्लीमनाबाद में बन रही देश की सबसे लंबी भूमिगत वाटर टनल अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है. करीब 12 किलोमीटर लंबी इस सुरंग में सिर्फ दो मीटर खुदाई बाकी है. ब्रेकथ्रू के बाद बरगी बांध का पानी पहली बार बिना पंप के प्राकृतिक बहाव से विंध्य क्षेत्र तक पहुंचेगा.

India Longest Water TunnelIndia Longest Water Tunnel
क‍िसान तक
  • कटनी,
  • Jul 17, 2026,
  • Updated Jul 17, 2026, 9:26 AM IST

मध्य प्रदेश के कटनी जिले में बन रही देश की सबसे लंबी भूमिगत जल सुरंग अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है. स्लीमनाबाद क्षेत्र में लगभग 12 किलोमीटर लंबी इस वाटर टनल में अब केवल दो मीटर की खुदाई बाकी है. इसके पूरा होते ही परियोजना का बहुप्रतीक्षित ब्रेकथ्रू होगा और पहली बार बरगी बांध का पानी प्राकृतिक ढाल के सहारे बिना किसी पंप या लिफ्ट प्रणाली के विंध्य क्षेत्र तक पहुंच सकेगा. इसे प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं में शामिल किया जाएगा, जिससे लाखों किसानों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है.

डेढ़ दशक की मेहनत के बाद अंतिम मुकाम पर परियोजना

बरगी व्यपवर्तन परियोजना के तहत जबलपुर स्थित बरगी बांध से नर्मदा का पानी विंध्य क्षेत्र तक पहुंचाने की योजना करीब डेढ़ दशक पहले शुरू की गई थी. स्लीमनाबाद में 11.952 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग का निर्माण इस परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा रहा. 

शुरुआत में इसकी अनुमानित लागत 799 करोड़ रुपये तय की गई थी, लेकिन कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों और तकनीकी चुनौतियों के कारण परियोजना की लागत बढ़कर करीब 1,442 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. अब टनल बोरिंग मशीन अंतिम छोर तक पहुंच चुकी है और निर्माण कार्य अपने समापन की ओर बढ़ रहा है.

जर्मन तकनीक से काटी गई विंध्य की कठोर चट्टानें

इस सुरंग के निर्माण में जर्मनी की अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन का उपयोग किया गया. विंध्य क्षेत्र की कठोर चट्टानों के बीच लगभग 10.14 मीटर व्यास वाली इस विशाल सुरंग का निर्माण आसान नहीं था. इंजीनियरों और विशेषज्ञों ने लंबे समय तक लगातार काम करते हुए इस चुनौतीपूर्ण परियोजना को अंतिम चरण तक पहुंचाया. यह सुरंग नर्मदा के जल को प्राकृतिक बहाव के जरिए सोन बेसिन से जोड़ने का माध्यम बनेगी, जिससे ऊर्जा की बचत भी होगी क्योंकि पानी पहुंचाने के लिए किसी पंपिंग सिस्टम की जरूरत नहीं पड़ेगी.

1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई लाभ

परियोजना पूरी होने के बाद कटनी, जबलपुर, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा जिलों के लगभग 1,450 गांवों की करीब 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी. इनमें सबसे अधिक लाभ सतना जिले को मिलेगा, जहां 1.04 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र सिंचित होगा. इसके अलावा मैहर में 54,227 हेक्टेयर, कटनी में 21,823 हेक्टेयर, रीवा में 3,084 हेक्टेयर और पन्ना में 448 हेक्टेयर भूमि को बरगी बांध का पानी मिलेगा. इससे सिंचाई क्षमता बढ़ने के साथ किसानों की खेती की लागत कम होने और उत्पादन में वृद्धि की संभावना है.

227 क्यूमेक क्षमता वाली मुख्य नहर से जुड़ेगी टनल

बरगी व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत स्लीमनाबाद की दाई तट मुख्य नहर को प्रदेश की सबसे अधिक 227 क्यूमेक पानी वहन क्षमता वाली नहर माना जा रहा है. टनल का निर्माण मुख्य नहर के 104 किलोमीटर से 116.865 किलोमीटर हिस्से के बीच किया गया है. इसके बाद 129 किलोमीटर तक खुली नहर के माध्यम से पानी आगे पहुंचाया जाएगा. टनल के भीतर जल प्रवाह क्षमता 152 क्यूमेक निर्धारित की गई है, जिससे बड़े क्षेत्र में निर्बाध जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी.

अक्टूबर से किसानों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य

कटनी जिला कलेक्टर आशीष तिवारी ने बताया कि अगले लगभग छह सप्ताह में अंतिम खुदाई पूरी कर परीक्षण शुरू करने की योजना है. अगर परीक्षण सफल रहता है तो अक्टूबर 2026 से किसानों के खेतों तक बरगी बांध का पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. परियोजना पूरी होने के बाद विंध्य क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी और खेती के लिए बारिश पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है.

ब्रेकथ्रू के बाद मुख्यमंत्री के दौरे की संभावना

वहीं, टनल का ब्रेकथ्रू पूरा होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्लीमनाबाद पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि, उनके दौरे की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. जिला प्रशासन और संबंधित विभाग संभावित कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारियों में जुटे हुए हैं. (अमर ताम्रकार की रिपोर्ट)

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