Fruit Import: FTA में सेब, कीवी, नाशपाती के 'सस्‍ते आयात' पर बिफरे किसान, CM से लगाई गुहार

Fruit Import: FTA में सेब, कीवी, नाशपाती के 'सस्‍ते आयात' पर बिफरे किसान, CM से लगाई गुहार

Apple Import Issue: न्यूजीलैंड से सस्ते सेब के आयात पर हिमाचल के बागवान नाराज हैं. मुख्यमंत्री ने कहा है कि वह केंद्रीय मंत्रियों से बात करेंगे. किसान संगठन आंदोलन की चेतावनी भी दे रहे हैं. आगे क्या रणनीति बनेगी? विस्तार से जानिए...

Himachal Fruit FarmersHimachal Fruit Farmers
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jan 14, 2026,
  • Updated Jan 14, 2026, 2:08 PM IST

केंद्र सरकार लगातार भारतीय उत्‍पादों के लिए नए बाजार खोज रही है. साथ ही कई देशों और उनके यूनियन के साथ फ्री ट्रेड डील के लिए बातचीत कर रही है. वहीं, कुछ के साथ फ्री ट्रेड डील साइन भी हो चुकी है. इसमें न्‍यूजीलैंड से हुई फ्री ट्रेड डील भी शामिल है, लेकिन यह डील भारत के सेब किसानों के लिए चिंता का कारण बन गई है. क्‍योंकि केंद्र ने वहां के सेब के आयात को मंजूरी दे दी है. इस बीच, अब हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों को लेकर राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के सामने उनकी चिंता मजबूती से रखने का भरोसा दिया है.

बागवानों के नुकसान का मुद्दा उठाएंगे सीएम

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि सेब पर आयात शुल्क घटाए जाने से स्थानीय बागवानों को हो रहे नुकसान का मुद्दा वह केंद्रीय वित्त और वाणिज्य मंत्रियों के सामने उठाएंगे. सीएम ने कहा कि राज्य की आर्थिकी में सेब उत्पादन की अहम भूमिका है और इसे कमजोर नहीं होने दिया जाएगा.

न्‍यूजीलैंड FTA ने बढ़ाई प्रतिस्‍पर्धा: CM

शिमला में प्रगतिशील सेब बागवानों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि न्यूजीलैंड से आयात होने वाले सेब पर ड्यूटी कम किए जाने से हिमाचल के उत्पादकों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई है. ऐसे में केंद्र सरकार से बात कर कोई ऐसा समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी, जिससे स्थानीय किसानों के हित सुरक्षित रह सकें.

संयुक्‍त किसान मंच ने रखा अपना पक्ष 

मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि राज्य सरकार के लिए बागवानी क्षेत्र केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की आर्थिक रीढ़ है. बैठक के दौरान किसान संगठनों ने केंद्र सरकार की व्यापार नीतियों पर भी सवाल उठाए. संयुक्त किसान मंच के सह संयोजक संजय चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार विभिन्न देशों के साथ जो व्यापार समझौते कर रही है, उनमें कृषि उत्पादों पर शुल्क घटाने का प्रावधान है, जिसका सीधा असर देश के किसानों पर पड़ेगा. 

आयात शुल्‍क आधा करने का लगाया आरोप

चौहान ने आरोप लगाया कि सेब जैसे संवेदनशील उत्पाद पर आयात शुल्क कम करने से विदेशी फल सस्ते दामों पर भारतीय बाजार में पहुंचेंगे और स्थानीय बागवानों को भारी नुकसान होगा. किसान नेताओं का कहना है कि हाल में न्यूजीलैंड के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते में सेब पर आयात शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है. 

दूसरे राज्‍यों का सहयोग जुटाने की तैयारी

इसके अलावा नाशपाती और कीवी जैसे फलों पर भी बेहद कम या शून्य शुल्क तय किया गया है. ऐसे फैसलों से हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड के करीब 15 लाख से अधिक बागवानी परिवारों की आजीविका पर संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है. सेब उत्पादक संगठनों ने मुख्यमंत्री के सामने यह मांग भी रखी कि अगर केंद्र सरकार इन व्यापार समझौतों से सेब और अन्य कृषि उत्पादों को बाहर नहीं करती है तो राज्य सरकार को अन्य पहाड़ी राज्यों के साथ मिलकर साझा रणनीति अपनानी चाहिए.

किसानों ने संकेत दिए कि जरूरत पड़ने पर हिमाचल, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड के किसान दिल्ली तक संयुक्त मार्च करने के लिए भी तैयार हैं. मुख्यमंत्री सुक्खू ने बागवानों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है और हर संभव स्तर पर उनकी आवाज उठाई जाएगी. उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की अनदेखी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी और केंद्र से बातचीत के जरिए इस मसले का व्यावहारिक समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी. (पीटीआई)

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