प्याज फसल नुकसान मामले में खाद कंपनी को राहत, कंज्‍यूमर कोर्ट ने पलटा जिला फोरम का फैसला

प्याज फसल नुकसान मामले में खाद कंपनी को राहत, कंज्‍यूमर कोर्ट ने पलटा जिला फोरम का फैसला

महाराष्ट्र में प्याज फसल नुकसान मामले में राज्य उपभोक्ता आयोग ने खाद कंपनी और विक्रेता को राहत दे दी. आयोग ने जिला स्तर पर दिया गया मुआवजा आदेश रद्द करते हुए कहा कि कम उत्पादन के लिए केवल खाद को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता और पर्यावरणीय कारण भी असर डाल सकते हैं.

Consumer court overturnes decision in fertilizer company sideConsumer court overturnes decision in fertilizer company side
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 11, 2026,
  • Updated Jun 11, 2026, 7:01 PM IST

महाराष्ट्र में प्याज की फसल खराब होने के मामले में राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने खाद निर्माता कंपनी और विक्रेता को राहत देते हुए जिला आयोग का मुआवजा आदेश रद्द कर दिया है. उपभोक्‍ता कोर्ट ने कहा कि फसल उत्पादन में कमी आने का कारण केवल खाद को नहीं माना जा सकता और इस तरह के मामलों में अन्य परिस्थितियों की भी जांच जरूरी होती है. यह मामला नासिक जिले के 12 से ज्‍यादा किसानों की शिकायतों से जुड़ा था. किसानों का कहना था कि उन्होंने स्थानीय विक्रेता से सुपर फॉस्फेट खाद खरीदी और उसका उपयोग प्याज की खेती में किया, लेकिन फसल उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई. किसानों ने दावा किया कि खाद का असर ठीक नहीं रहा और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. इसके बाद अलग-अलग याचिकाओं के जरिए मामला जिला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा.

स्थानीय जांच रिपोर्ट बनी थी मुआवजा आदेश का आधार

शिकायतों के बाद तालुका स्तर की शिकायत निवारण समिति ने सितंबर 2022 में सर्वे किया था. इस निरीक्षण में कई खेतों में 60 से 70 प्रतिशत तक नुकसान का उल्लेख किया गया. शुरुआती स्तर पर उर्वरक नियंत्रण प्रयोगशाला की रिपोर्ट में भी खाद के नमूने को मानक के अनुरूप नहीं बताया गया था. इन्हीं तथ्यों को आधार बनाते हुए जिला आयोग ने निर्माता और विक्रेता को किसानों को मुआवजा देने के निर्देश दिए थे.

अपील में कंपनी ने उठाए प्रक्रिया और प्रमाण से जुड़े सवाल

फैसले को चुनौती देते हुए खाद निर्माता कंपनी और विक्रेता ने राज्य आयोग में अपील दायर की. कंपनी का कहना था कि किसानों की ओर से यह स्पष्ट प्रमाण नहीं दिया गया कि संबंधित खाद का उपयोग उन्हीं खेतों में किया गया था, जिनकी पैदावार प्रभावित हुई. कंपनी ने यह भी कहा कि खेतों के निरीक्षण और सर्वे के दौरान उसके प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया गया.

राष्ट्रीय परीक्षण संस्‍था की जांच रिपोर्ट से बदला फैसला

सुनवाई के दौरान कंपनी ने राष्ट्रीय परीक्षण संस्था, कोलकाता की रिपोर्ट पेश की, जिसमें खाद की गुणवत्ता को सही बताया गया. राज्य आयोग ने माना कि जिला स्तर पर फैसला देने से पहले तीसरे पक्ष की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए था. आयोग ने कहा कि कम उत्पादन के पीछे मौसम और अन्य पर्यावरणीय कारण भी हो सकते हैं, इसलिए केवल खाद कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. इसी आधार पर मुआवजा आदेश रद्द कर दिया गया. (पीटीआई)

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