Iran Crisis का असर: भारत में बासमती चावल के दाम गिरे, आगे और गिरावट की आशंका

Iran Crisis का असर: भारत में बासमती चावल के दाम गिरे, आगे और गिरावट की आशंका

ईरान में जारी उथल-पुथल और व्यापार बाधाओं के चलते भारत में बासमती चावल की कीमतों में गिरावट आई है. निर्यात जोखिम बढ़ने से आने वाले हफ्तों में दाम और टूट सकते हैं.

basmati rice price fallbasmati rice price fall
क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Jan 13, 2026,
  • Updated Jan 13, 2026, 2:50 PM IST

ईरान में जारी उठा-पटक के बीच भारत में बासमती चावल के दाम में गिरावट है. ईरान भारत के बासमती का बड़ा खरीदार है, लेकिन वहां अभी गृह युद्ध जैसे हालात बने हैं जिससे बासमती की मांग कम हो गई है. इससे घरेलू बाजारों में बासमती के दाम में गिरावट है. इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन ने कहा है कि पिछले एक हफ्ते में घरेलू बाजारों में बासमती चावल की कीमतों में तेजी से गिरावट आई है, क्योंकि ईरान में बढ़ते हिंसक विरोध प्रदर्शनों के कारण व्यापार डिस्टर्ब हुआ है, पेमेंट में देरी हुई है, और भारतीय निर्यातकों के बीच जोखिम की आशंका बढ़ गई है. 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगाने की हालिया टिप्पणियों का ज़िक्र करते हुए, फेडरेशन ने कहा कि अमेरिका को भारतीय चावल निर्यात पर पहले से ही 50% ड्यूटी लगती है.

एक हफ्ते में 5 रुपये की गिरावट

पिछले एक हफ्ते में, ज्यादातर मुख्य बासमती किस्मों की कीमतों में 5 रुपये प्रति किलो की गिरावट आई है. 1121 बासमती के मौजूदा रेट 80 रुपये प्रति किलो और 1121 सेला के 75 रुपये प्रति किलो हैं. फेडरेशन ने एक रिलीज में कहा कि 1509, 1718 और 1401 जैसी किस्मों की कीमतों में एक हफ्ते पहले की तुलना में 5-7 रुपये प्रति किलो की गिरावट आई है. मौजूदा हालातों के बीच आने वाले हफ्तों में कीमतें और गिर सकती हैं.

गिरती कीमतों के बीच, फेडरेशन ने निर्यातकों से पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप में अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए कहा है ताकि ईरान जाने वाले शिपमेंट में किसी भी लंबे समय तक मंदी के असर को कम किया जा सके. फेडरेशन के उपाध्यक्ष देव गर्ग ने कहा, "हम कोई खतरे की घंटी नहीं बजा रहे हैं, बल्कि सावधानी बरतने की अपील कर रहे हैं... निर्यातकों और किसानों दोनों की सुरक्षा के लिए एक संतुलित नजरिया रखना जरूरी है."

ईरान बासमती का बड़ा बाजार

गर्ग ने आगे कहा, "ईरान ऐतिहासिक रूप से भारतीय बासमती के लिए एक मुख्य बाजार रहा है. हालांकि, मौजूदा आंतरिक उथल-पुथल ने व्यापार चैनलों को डिस्टर्ब किया है, पेमेंट धीमा कर दिया है, और खरीदारों के भरोसे को कम किया है." फेडरेशन ने कहा कि अप्रैल-नवंबर के दौरान, ईरान को भारत का बासमती निर्यात 4681 लाख डॉलर रहा, जिसमें मात्रा 598,793 टन तक पहुंच गई.

इसने निर्यातकों से ईरानी कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े जोखिमों का फिर से समझने, सुरक्षित पेमेंट सिस्टम अपनाने और विशेष रूप से ईरानी बाजार के लिए रखे गए स्टॉक का ज्यादा इस्तेमाल करने से बचने की अपील की.

फेडरेशन ने कहा कि आयातकों ने मौजूदा ऑर्डर को पूरा करने और भारत को फंड भेजने में कठिनाइयों का संकेत दिया है. रिलीज में कहा गया है, "हालांकि अतीत में भी इसी तरह के संकट आए हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति का रास्ता अभी भी साफ नहीं है और आने वाले हफ्तों में कीमतों, लिक्विडिटी और व्यापार में और अधिक गड़बड़ी होने की उम्मीद है." 

ट्रंप के टैरिफ से बढ़ी परेशानी

तेहरान के साथ व्यापार करने पर ट्रंप की टैरिफ टिप्पणी पर फेडरेशन ने कहा, "फिलहाल, इस बारे में कम जानकारी है कि 25% टैरिफ मौजूदा 50% ड्यूटी के ऊपर लगाया जाएगा या इसे अलग तरीके से लागू किया जाएगा. अगर टैरिफ का बोझ और भी बढ़ता है, तो भी फेडरेशन को अमेरिकी बाजार में भारतीय चावल के निर्यात में कोई बड़ी गिरावट नहीं दिख रही है." अमेरिका भारतीय चावल के लिए टॉप 10 बाजारों में से एक है, और भारतीय बासमती के लिए चौथा सबसे बड़ा डेस्टिनेशन है.

ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले सभी देशों पर तुरंत प्रभाव से 25% टैरिफ लगा दिया है. "यह आदेश अंतिम और निर्णायक है. इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद!" ट्रंप ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा. ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में चीन, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, इराक और भारत शामिल हैं, और इस कदम से अमेरिका को भारतीय सामानों पर पहले से ही ऊंचे टैरिफ और भी बढ़ सकते हैं.

ट्रंप की यह घोषणा देश में प्रदर्शनकारियों पर तेहरान की कड़ी कार्रवाई के जवाब में आई है, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए हैं.

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