
आंध्र प्रदेश में समुद्री संसाधनों से आय बढ़ाने की दिशा में सरकार ने नई पहल तेज कर दी है. मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि समुद्री शैवाल यानी सीवीड खेती को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत और व्यावहारिक आर्थिक मॉडल तैयार किया जाए. इसका मकसद तटीय इलाकों में रहने वाले मछुआरों और महिला स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ाना है. बुधवार को समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश की लंबी समुद्री तटरेखा को देखते हुए सीवीड खेती बड़े पैमाने पर रोजगार और आय का जरिया बन सकती है. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस क्षेत्र में केवल खेती के साथ-साथ वैल्यू एडिशन यानी उत्पादों की प्रोसेसिंग पर भी बराबर ध्यान दिया जाए, ताकि किसानों और समूहों को बेहतर मुनाफा मिल सके.
इस दिशा में राज्य सरकार ने कई प्रमुख संस्थानों के साथ तालमेल बढ़ाने की योजना बनाई है. मुख्यमंत्री ने केंद्रीय नमक और समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान (CSIR-CSMCRI), राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT), भाकृअनुप-केंद्रीय खारा जल कृषि संस्थान (ICAR-CIBA), चेन्नई के विशेषज्ञों के साथ चर्चा की. इन संस्थानों की मदद से वैज्ञानिक तरीके और बेहतर उत्पादन मॉडल तैयार किए जाएंगे.
सीएम ने साफ किया कि इस योजना में महिला स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी. इसके लिए अमृता विश्व विद्यापीठम के साथ मिलकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें सीवीड खेती से होने वाली संभावित आय और बेहतर तकनीकों का आकलन किया जाएगा.
बैठक में यह भी जिक्र किया गया कि सीवीड फार्मास्यूटिकल और न्यूट्रास्यूटिकल उद्योगों के लिए अहम कच्चा माल है. ऐसे में अगर उत्पादन और प्रोसेसिंग को सही दिशा दी जाए तो यह क्षेत्र बड़े पैमाने पर आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है.
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ साझेदारी कर सीवीड उत्पादन को व्यावसायिक स्तर तक ले जाया जाए. ऐसा करने से आंध्र प्रदेश वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है और समुद्री संसाधनों के जरिए नई आर्थिक ताकत हासिल कर सकता है.
इससे पहले, अमरावती में सीएम एन चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) का स्टेट फोकस क्रेडिट प्लान जारी किया, जिसका कुल आकार 5.11 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक है.
इस योजना में कृषि क्षेत्र को लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये का सबसे बड़ा हिस्सा दिया गया है, जिसमें फसल ऋण प्रमुख है, जबकि पशुपालन, मत्स्य, बागवानी और कृषि ढांचे के विकास के लिए भी अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं. साथ ही, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए 1.64 लाख करोड़ रुपये का क्रेडिट सपोर्ट भी शामिल किया गया है. (पीटीआई)