
खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और कम सिंचाई पानी में अधिक उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि विभाग ने हनुमानगढ़ जिले के किसानों को बड़ी सौगात दी है. राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (NMEO-Oilseeds) के तहत जिले में सरसों के 1,600 क्विंटल प्रमाणित बीज को फ्री में बांटा जाएगा. इस पहल से करीब 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की खेती को बढ़ावा मिलने की संभावना है.
कृषि विभाग के अनुसार, पिछले साल जिले में सरसों की बुवाई 1.89 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई थी. इस बार रबी सीजन में सिंचाई जल की उपलब्धता को देखते हुए सरसों का रकबा 2.50 लाख से 3 लाख हेक्टेयर तक पहुंच सकता है. खरीफ सीजन में कम बारिश और बांधों के घटते जलस्तर ने रबी फसलों के लिए पानी की चुनौती बढ़ा दी है. ऐसे में कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली सरसों किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है.
कृषि संयुक्त निदेशक यशवंती ने बताया कि कुल 1,600 क्विंटल बीज में से 960 क्विंटल की आपूर्ति राजस्थान राज्य बीज निगम, हनुमानगढ़ और 640 क्विंटल की आपूर्ति राष्ट्रीय बीज निगम, सूरतगढ़ द्वारा की जाएगी.
वितरण के लिए जिले में क्षेत्रवार लक्ष्य निर्धारित किया गया है-
योजना के तहत प्रत्येक पात्र किसान को सरसों का 4 किलो बीज वाला एक मिनीकिट फ्री में दिया जाएगा. किसान अपने क्षेत्र के कृषि पर्यवेक्षक या सहायक कृषि अधिकारी से संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं. आवेदन के साथ जन आधार कार्ड और जमाबंदी की प्रति जमा करनी होगी.
परमिट जारी होने के बाद किसान वीसीपी के माध्यम से ग्राम सेवा सहकारी समिति (GSSS) या क्रय-विक्रय सहकारी समिति (KVSS) से बीज हासिल कर सकेंगे.
इस योजना के तहत किसानों को सरसों की नई उन्नत किस्म आरएच-1706 का बीज उपलब्ध कराया जाएगा. इस किस्म को वर्ष 2023 में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार द्वारा विकसित किया गया था.
किसानों से योजना का लाभ उठाने की अपील
कृषि विभाग ने किसानों से समय रहते आवेदन कर योजना का लाभ उठाने की अपील की है. विभाग का मानना है कि पानी की सीमित उपलब्धता वाले क्षेत्रों में सरसों की खेती न केवल किसानों की लागत कम कर सकती है, बल्कि खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.