मूली के बीज फेल होने पर किसान ने 3 साल तक लड़ी कानूनी लड़ाई, मुआवजे की राशि पर जताई निराशा

मूली के बीज फेल होने पर किसान ने 3 साल तक लड़ी कानूनी लड़ाई, मुआवजे की राशि पर जताई निराशा

हरियाणा के फरीदाबाद में मूली की फसल बर्बाद होने के बाद किसान रामेश्वर शर्मा को करीब तीन साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी. किसान का आरोप है कि बीज में मिलावट के कारण फसल तैयार नहीं हुई. उन्होंने नुकसान और कानूनी खर्च सहित 2 लाख रुपये मुआवजा मांगा था, लेकिन उपभोक्ता फोरम ने 50 हजार रुपये देने का फैसला सुनाया.

Mooli Farmer Case HaryanaMooli Farmer Case Haryana
क‍िसान तक
  • Faridabad,
  • Oct 18, 2026,
  • Updated Oct 18, 2026, 4:49 PM IST

हरियाणा के फरीदाबाद के किसान रामेश्वर शर्मा ने मूली की खेती से कमाई की उम्मीद में अपनी जमा-पूंजी लगा दी, लेकिन खराब बीज ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया. किसान ने नवंबर 2023 में एक निजी बीज भंडार से टाइकोन वैरायटी का मूली बीज खरीदा था. उन्होंने एक एकड़ जमीन 60 हजार रुपये में किराए पर ली और बीज, खाद और खेत की जुताई पर भी पैसा खर्च किया. उन्हें उम्मीद थी कि फसल तैयार होने के बाद अच्छी आमदनी होगी, लेकिन नतीजा इसके उलट निकला.

मूली बनने के बजाय पौधों में निकलने लगीं बालियां

किसान रामेश्वर शर्मा ने कहा क‍ि बुवाई के करीब 20 दिन बाद ही मूली के पौधों में बालियां निकलने लगीं. पौधों में मूली विकसित नहीं हुई और फसल बाजार में बेचने लायक नहीं बची. इससे किसान को खेती में लगाई गई रकम के नुकसान का सामना करना पड़ा. 

रामेश्वर का आरोप है कि बीज में मिलावट के कारण यह स्थिति पैदा हुई. उन्होंने दावा किया कि दुकानदार और कंपनी के सर्वेयर ने भी बीज में करीब 90 प्रतिशत मिलावट होने की बात स्वीकार की थी. 

दो लाख रुपये मुआवजे के लिए पहुंचे उपभोक्ता फोरम

फसल खराब होने के बाद किसान ने दुकानदार के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई. रामेश्वर शर्मा ने फसल के नुकसान, मानसिक परेशानी और वकील की फीस सहित कुल दो लाख रुपये के मुआवजे की मांग की. उनका कहना है कि वर्ष 2023 से 2026 के बीच उन्हें करीब 15 से 20 बार सुनवाई के लिए अदालत जाना पड़ा. इस दौरान कानूनी प्रक्रिया में उनका समय और पैसा दोनों खर्च हुए.

तीन साल बाद मिला 50 हजार रुपये मुआवजा

करीब तीन साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद उपभोक्ता फोरम ने दुकानदार को दोषी ठहराते हुए 50 हजार रुपये मुआवजा देने का फैसला सुनाया. हालांकि, किसान की मांग के मुकाबले यह रकम काफी कम है. रामेश्वर ने कहा कि खेती की लागत और कानूनी कार्रवाई पर हुए खर्च को देखते हुए इस मुआवजे से उनके नुकसान की भरपाई नहीं हो पाएगी.

अपील करने से कतरा रहा किसान

फैसले से असंतुष्ट रामेश्वर शर्मा का कहना है कि तीन साल तक न्याय के लिए प्रयास करने के बाद भी उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली. उन्होंने पंचकूला में अपील करने की संभावना पर भी चिंता जताई है. किसान का कहना है कि वहां आने-जाने में ही करीब 50 हजार रुपये खर्च हो सकते हैं. ऐसे में अपील पर होने वाला खर्च मुआवजे की पूरी रकम के बराबर पड़ सकता है.

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