सब्जियों की बेहतर किस्में अब जल्दी आएंगी! IIVR में ICAR महानिदेशक ने शुरू कीं हाईटेक सुविधाएं

सब्जियों की बेहतर किस्में अब जल्दी आएंगी! IIVR में ICAR महानिदेशक ने शुरू कीं हाईटेक सुविधाएं

वाराणसी के भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR) में जीनोम एडिटिंग प्रयोगशाला, BSL-3 लैब और स्पीड ब्रीडिंग सुविधा से जुड़े बड़े कदम उठाए गए हैं. ICAR महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट के दौरे के दौरान इन सुविधाओं का शुभारंभ किया गया.

धर्मेंद्र सिंह
  • Varanasi ,
  • Oct 17, 2026,
  • Updated Oct 17, 2026, 5:26 PM IST

किसानों को जल्द मिलेंगी उन्नत सब्जी किस्में. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट ने 17 अक्टूबर 2026 को भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी का दौरा किया.इस दौरान संस्थान में जीनोम एडिटिंग प्रयोगशाला के निर्माण के लिए भूमि पूजन किया गया, जबकि बायोसेफ्टी लेवल-3 (BSL-3) प्रयोगशाला और स्पीड ब्रीडिंग सुविधा का उद्घाटन किया गया. इन आधुनिक सुविधाओं से सब्जियों की नई किस्में विकसित करने, अनुसंधान को गति देने और किसानों तक उन्नत तकनीक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है.

जीनोम एडिटिंग से विकसित होंगी उन्नत सब्जी किस्में

संस्थान में निर्माणाधीन जीनोम एडिटिंग प्रयोगशाला सब्जी फसलों के अनुसंधान को नई दिशा दे सकती है. इस तकनीक के माध्यम से फसलों के आनुवंशिक गुणों में लक्षित बदलाव कर बेहतर किस्मों के विकास पर काम किया जाएगा.

इसका प्रमुख उद्देश्य अधिक उत्पादकता, बेहतर पोषण गुणवत्ता, रोगों और कीटों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता तथा बदलती जलवायु के अनुकूल सब्जी किस्मों का विकास करना है. जलवायु परिवर्तन और फसलों में बढ़ती चुनौतियों के बीच ऐसी तकनीकें कृषि अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं.

BSL-3 प्रयोगशाला में सुरक्षित वातावरण में होगा अनुसंधान

आईआईवीआर में बायोसेफ्टी लेवल-3 (BSL-3) प्रयोगशाला का भी उद्घाटन किया गया. यह एक विशेष प्रकार की प्रयोगशाला है, जिसे निर्धारित जैव-सुरक्षा मानकों के तहत जोखिम वाले जैविक कारकों पर अनुसंधान के लिए तैयार किया जाता है.

इस सुविधा से वैज्ञानिकों को नियंत्रित और सुरक्षित वातावरण में उन्नत अनुसंधान कार्य करने में मदद मिलेगी.संस्थान में आधुनिक अनुसंधान सुविधाओं का विस्तार सब्जी फसलों से जुड़ी समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान खोजने की दिशा में अहम कदम है.

स्पीड ब्रीडिंग से तेजी से विकसित होंगी नई किस्में

इस दौरे की एक प्रमुख उपलब्धि स्पीड ब्रीडिंग सुविधा का उद्घाटन रहा. इसके जरिए सब्जी फसलों में नई पीढ़ियां तेजी से विकसित की जा सकेंगी और किस्म सुधार की प्रक्रिया को गति मिलेगी.

परंपरागत प्रजनन कार्यक्रमों में कई फसलों के लिए एक सीजन में एक पीढ़ी प्राप्त करना सामान्य रहा है. स्पीड ब्रीडिंग की मदद से अनुकूल परिस्थितियों में कम समय में अधिक पीढ़ियां विकसित करना संभव हो सकता है.इससे नई किस्मों के विकास और उनके मूल्यांकन में लगने वाला समय कम करने में मदद मिलेगी.

किसानों के लिए इसका महत्व इसलिए भी है, क्योंकि बेहतर उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और जलवायु के अनुकूल गुणों वाली किस्मों को विकसित करने की प्रक्रिया तेज हो सकती है.

वैज्ञानिकों के साथ अनुसंधान प्राथमिकताओं पर चर्चा

दौरे के दौरान ICAR के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने संस्थान के प्रयोग क्षेत्रों का भ्रमण किया. उन्होंने सब्जी फसलों की नई किस्मों, हाइब्रिड तकनीकों, उत्पादन प्रौद्योगिकियों और विभिन्न प्रदर्शनों का अवलोकन किया.

वैज्ञानिकों के साथ संवाद में किस्म सुधार, उत्पादकता बढ़ाने और अनुसंधान को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया.साथ ही दलहन और तिलहन फसलों पर केंद्रित अनुसंधान को भी गति देने का आह्वान किया गया.

किसानों और FPO के साथ हुआ संवाद

इस अवसर पर किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और प्रगतिशील किसानों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें सब्जियों के साथ दलहन एवं तिलहन फसलों के विस्तार, आधुनिक कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने और उनकी आय बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई.

कृषि अनुसंधान का वास्तविक लाभ तभी व्यापक स्तर पर पहुंच सकता है, जब वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तकनीकों को खेतों तक पहुंचाया जाए और किसान उन्हें अपनी परिस्थितियों के अनुसार अपना सकें. इस लिहाज से संस्थान और किसानों के बीच संवाद को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

संस्थान की उपलब्धियों पर दी गई प्रस्तुति

कार्यक्रम के समापन पर आईआईवीआर के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने संस्थान की अनुसंधान उपलब्धियों, नई पहलों और किसान-उन्मुख तकनीकों की जानकारी दी. महानिदेशक ने वैज्ञानिकों को उपलब्धियों के लिए बधाई देते हुए भविष्य की अनुसंधान प्राथमिकताओं, बुनियादी सुविधाओं और तकनीक हस्तांतरण को मजबूत करने के लिए मार्गदर्शन दिया.

दौरे के दौरान उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. देवेंद्र कुमार यादव, उप महानिदेशक (कृषि प्रसार) डॉ. राजवीर सिंह और सहायक महानिदेशक (फसल एवं बागवानी विज्ञान) डॉ. सुधाकर पांडेय भी उपस्थित रहे. कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों ने परिसर में रक्तचंदन का पौधा लगाया.

किसानों के लिए क्यों अहम हैं ये सुविधाएं?

आईआईवीआर, वाराणसी देश में सब्जी अनुसंधान का एक प्रमुख केंद्र है. यहां विकसित होने वाली उन्नत किस्में और उत्पादन तकनीकें किसानों की उत्पादकता, फसल की गुणवत्ता और खेती की चुनौतियों से निपटने की क्षमता को बेहतर बनाने में योगदान दे सकती हैं.

जीनोम एडिटिंग, BSL-3 और स्पीड ब्रीडिंग जैसी सुविधाओं के विस्तार से संस्थान की अनुसंधान क्षमता मजबूत होगी. हालांकि, किसानों को इन पहलों का प्रत्यक्ष लाभ नई किस्मों के विकास, परीक्षण, उपयुक्तता और उनके खेतों तक पहुंचने के बाद ही मिल सकेगा.

कुल मिलाकर, आईआईवीआर में इन आधुनिक सुविधाओं की शुरुआत भारतीय सब्जी अनुसंधान को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इससे भविष्य में पोषण सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और किसानों की बदलती जरूरतों के अनुरूप नई तकनीकों एवं सब्जी किस्मों के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

 

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