Tractor News: डीजल को कहें अलविदा, अब खेती में हुई इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर की एंट्री

Tractor News: डीजल को कहें अलविदा, अब खेती में हुई इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर की एंट्री

साल 2026 में भारतीय खेती में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं. कम खर्च, आसान संचालन, सरकारी मदद और साफ पर्यावरण के कारण किसान डीज़ल ट्रैक्टर छोड़कर इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर अपना रहे हैं.

इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर (सांकेतिक फोटो)इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर (सांकेतिक फोटो)
क‍िसान तक
  • Noida ,
  • Jan 19, 2026,
  • Updated Jan 19, 2026, 11:39 AM IST

भारत की खेती साल 2026 में धीरे-धीरे बदल रही है. आज देश के ज़्यादातर किसान छोटे हैं और उनके पास कम जमीन है. ऐसे किसान ऐसे ट्रैक्टर चाहते हैं जो सस्ते हों, चलाने में आसान हों और ज़्यादा खर्च न कराएं. पहले इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर को लोग सिर्फ एक नया प्रयोग मानते थे, लेकिन अब ये असली काम के लिए इस्तेमाल होने लगे हैं. अब किसान समझ रहे हैं कि इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर खेती के लिए फायदेमंद हो सकते हैं.

डीजल महंगा, बिजली सस्ती

पिछले कुछ सालों में डीजल बहुत महंगा हो गया है. एक आम डीजल ट्रैक्टर रोज चलाने में काफी डीज़ल पीता है, जिससे किसान का खर्च बढ़ जाता है. साल भर में किसान को डीज़ल पर बहुत पैसे देने पड़ते हैं. वहीं, इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर बिजली से चलते हैं और बिजली का खर्च कम आता है. किसान साल में काफी पैसे बचा सकते हैं. साथ ही, इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर में इंजन के कम पुर्ज़े होते हैं, इसलिए इनके खराब होने की संभावना भी कम होती है और मरम्मत का खर्च भी घट जाता है.

छोटे खेतों के लिए सही आकार

भारत में ज़्यादातर खेत छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटे हुए हैं. इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर इसी बात को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं. ये ट्रैक्टर रोज़ 4 से 6 घंटे आराम से काम कर सकते हैं, जो आम खेती के लिए काफी है. एक बार चार्ज करने पर किसान खेत जोतने, दवा छिड़कने और सामान ढोने जैसे काम कर सकते हैं. रात में जब किसान आराम करता है, तब ट्रैक्टर को चार्ज किया जा सकता है. इससे काम में कोई रुकावट नहीं आती.

सरकार का साथ

सरकार भी चाहती है कि किसान नई और साफ तकनीक अपनाएं. इसलिए कई राज्यों में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर खरीदने पर पैसे की मदद दी जा रही है. टैक्स भी कम रखा गया है, जिससे ट्रैक्टर की कीमत थोड़ी कम हो जाती है. बैंक से लोन लेना भी आसान हो गया है. इससे छोटे किसान भी इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर खरीदने की हिम्मत कर पा रहे हैं.

साफ हवा और कम शोर

डीजल ट्रैक्टर से धुआं निकलता है, जो हवा को गंदा करता है. इससे सेहत को नुकसान होता है. इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर से कोई धुआं नहीं निकलता, इसलिए हवा साफ रहती है. ये ट्रैक्टर बहुत कम आवाज़ करते हैं, जिससे गांव में शांति बनी रहती है. स्कूल, घर और बाग़ के पास काम करना आसान हो जाता है.

नई तकनीक और ताकत

आज के इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर पहले से ज़्यादा ताकतवर हो गए हैं. ये कीचड़ और ऊबड़-खाबड़ खेत में भी अच्छे से चलते हैं. इनकी बैटरी कई साल तक चलती है. इनमें लगी मशीनें किसान को बताती हैं कि ट्रैक्टर कितना चला, कितनी बिजली खर्च हुई और कब देखभाल की जरूरत है. इससे किसान अपना काम और बेहतर तरीके से कर पाते हैं.

काम करने में आसान

गांवों में अब मज़दूर कम मिलते हैं. ऐसे में ऐसे ट्रैक्टर चाहिए जो चलाने में आसान हों. इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर कम हिलते हैं, इसलिए शरीर जल्दी नहीं थकता. इन्हें चलाने के लिए ज़्यादा ताकत या खास ट्रेनिंग की ज़रूरत नहीं होती. बुज़ुर्ग किसान और परिवार के लोग भी इन्हें आराम से चला सकते हैं.

भविष्य की खेती का सही साथी

साल 2026 में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर अब कोई नई चीज़ नहीं रहे. ये खेती के भरोसेमंद साथी बनते जा रहे हैं. सस्ते, साफ और समझदारी से बने ये ट्रैक्टर किसानों की ज़िंदगी आसान बना रहे हैं. आने वाले समय में जब गांवों में सौर ऊर्जा और बढ़ेगी, तब इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर खेती को और मजबूत बनाएंगे. भारतीय किसानों के लिए ये अब एक समझदारी भरा और जरूरी चुनाव बनते जा रहे हैं.

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