FlySakhi: IIT हैदराबाद में 25 ग्रामीण महिलाओं ने सीखी ड्रोन तकनीक, अब कृषि उद्यमी बनाने की तैयारी

FlySakhi: IIT हैदराबाद में 25 ग्रामीण महिलाओं ने सीखी ड्रोन तकनीक, अब कृषि उद्यमी बनाने की तैयारी

हैदराबाद स्थित आईआईटी में FlySakhi कार्यक्रम के पहले बैच की 25 ग्रामीण महिलाओं ने ड्रोन ट्रेनिंग पूरी की. WCOOPEF, CNRI, TiHAN-IIT हैदराबाद और Syngenta India की इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को कृषि ड्रोन तकनीक में प्रशिक्षित कर ड्रोन सेवा उद्यमी बनाना है.

FlySakhi Drone Training IIT HyderbadFlySakhi Drone Training IIT Hyderbad
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Oct 15, 2026,
  • Updated Oct 15, 2026, 8:10 PM IST

ग्रामीण महिलाओं को कृषि ड्रोन तकनीक से जोड़कर उद्यमी बनाने की दिशा में ‘फ्लाईसखी-ड्रोन क्वींस ऑफ भारत’ कार्यक्रम के पहले बैच ने प्रशिक्षण पूरा कर लिया है. इसके तहत 25 ग्रामीण महिलाओं को प्रमाणपत्र दिए गए. वर्ल्ड कोऑपरेशन इकोनॉमिक फोरम (WCOOPEF) और कॉन्फेडरेशन ऑफ एनजीओज ऑफ रूरल इंडिया (CNRI) की इस पहल में टीआईएचएएन-आईआईटी हैदराबाद तकनीकी भागीदार और सिंजेंटा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड सीएसआर भागीदार है. कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देने के साथ कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन सेवाओं से जुड़े उद्यम शुरू करने के लिए तैयार करना है.

ड्रोन संचालन से लेकर कारोबार तक की ट्रेनिंग मिली

‘एम्पावरिंग वुमन एंटरप्रेन्योर्स थ्रू एग्रीकल्चरल ड्रोन टेक्नोलॉजी’ विषय पर आधारित इस कार्यक्रम में महिलाओं को केवल ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित करने के बजाय उन्हें ड्रोन सेवा उद्यमों की मालिक बनाने पर जोर दिया गया है. प्रशिक्षण 5 अक्टूबर 2026 को ऑनलाइन सैद्धांतिक मॉड्यूल के साथ शुरू हुआ था. इसके बाद महिलाओं को टीआईएचएएन, आईआईटी हैदराबाद में ड्रोन उड़ाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया.

प्रशिक्षण में ड्रोन संचालन, उड़ान सुरक्षा, कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन के विभिन्न इस्तेमाल और ‘ड्रोन-एज-ए-सर्विस’ बिजनेस मॉडल को शामिल किया गया. कार्यक्रम के तहत दिए गए प्रमाणपत्रों को संस्थागत लोन से जोड़ने के लिहाज से तैयार किया गया है. इसका उद्देश्य प्रशिक्षित महिलाओं के लिए ड्रोन खरीदने और अपना सेवा कारोबार शुरू करने हेतु वित्तीय सहायता हासिल करने का रास्ता आसान करना है.

खेती में ड्रोन सेवाओं से कमाई के नए अवसर खुले

फ्लाईसखी से जुड़ी महिलाएं किसानों, सहकारी संस्थाओं और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को शुल्क के बदले ड्रोन सेवाएं दे सकती हैं. इससे फसल सुरक्षा और छिड़काव के अलावा कृषि निगरानी, खेतों की मैपिंग और फसल नुकसान के आकलन जैसी सेवाओं के जरिए कमाई के अवसर बन सकते हैं.

कार्यक्रम में ड्रोन के इस्तेमाल को फसल की सेहत की निगरानी, कीट एवं रोगों के शुरुआती संकेतों की पहचान और पोषक तत्वों की कमी का पता लगाने से जोड़ा गया है. ड्रोन के जरिए तरल और नैनो उर्वरकों का सटीक इस्तेमाल, बीजों का प्रसारण तथा कवर क्रॉप की बुवाई जैसे काम भी किए जा सकते हैं. इससे कृषि संसाधनों के इस्तेमाल को अधिक सटीक बनाने और इनपुट की बर्बादी कम करने में मदद मिल सकती है.

इसके अलावा ड्रोन से प्रभावित खेतों का हवाई सर्वेक्षण कर फसल नुकसान का आकलन, बीमा दावों के निपटारे में सहायता और खेतों एवं ग्रामीण बस्तियों की मैपिंग की जा सकती है. जल निकासी, जलभराव और सिंचाई की योजना बनाने के साथ बाढ़, सूखा और ओलावृष्टि के बाद नुकसान का आकलन करने में भी इनका इस्तेमाल संभव है. 

पशुपालन, मत्स्य पालन, वानिकी, ग्रामीण क्षेत्रों में दवाओं एवं टीकों की आपूर्ति और सौर ऊर्जा संयंत्रों, नहरों और बिजली लाइनों के निरीक्षण में भी ड्रोन सेवाओं की संभावनाएं हैं. हालांकि, इनमें से कई कामों के लिए अतिरिक्त उपकरण, उन्नत प्रशिक्षण और नियामकीय मंजूरियों की आवश्यकता होगी.

सहकारिता और तकनीक की भूमिका अहम: दिलीप संघाणी

वर्ल्ड कोऑपरेशन इकोनॉमिक फोरम के चेयरमैन दिलीप संघाणी ने कार्यक्रम का उद्घाटन संबोधन दिया. उन्होंने कहा कि जब कोई ग्रामीण महिला ड्रोन का नियंत्रण अपने हाथ में लेती है, तो वह भारतीय कृषि के भविष्य को संभालने की दिशा में कदम बढ़ाती है. सहकारिता महिलाओं को सामूहिक ताकत देती है, जबकि तकनीक उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देती है. फ्लाईसखी इन दोनों को एक साथ लाने का प्रयास है.

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. सी. तारा सत्यवती शामि‍ल हुईं. वह आईसीएआर-राष्ट्रीय पादप स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान (ICAR-NIPHM) की महानिदेशक और आईसीएआर-भारतीय कदन्न अनुसंधान संस्थान की निदेशक हैं. उन्होंने कहा कि कृषि में इनपुट का सटीक और सुरक्षित इस्तेमाल पादप स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है. प्रशिक्षित महिला ड्रोन पायलट वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को खेतों तक पहुंचा सकती हैं. उन्होंने ड्रोन के जरिए निगरानी और डेटा सेवाओं की बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया.

सिंजेंटा ने ग्रामीण आजीविका मजबूत करने पर दिया जोर

सिंजेंटा इंडिया की सीएफओ मीनल माहेश्वरी ने भी कार्यक्रम को संबोधि‍त किया. वहीं, सिंजेंटा इंडिया में सस्टेनेबिलिटी एंड कॉरपोरेट अफेयर्स की प्रमुख डॉ. संगीता डावर मेंदिरत्ता ने टिकाऊ कृषि और ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने सिंजेंटा की आई राइज (I RISE), आई क्लीन (I CLEAN) और वीकेयर (WeCare) जैसी पहलों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इन पहलों के जरिए ग्रामीण विकास और समुदायों के कल्याण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर काम किया जा रहा है.

फ्लाईसखी कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 के संदर्भ में ग्रामीण महिलाओं को तकनीक और वित्तीय अवसरों से जोड़ने का प्रयास है. इसका उद्देश्य खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका को पहचान देने के साथ भूमि, वित्त, तकनीक और बाजारों तक उनकी पहुंच से जुड़ी चुनौतियों पर ध्यान देना है.

यह कार्यक्रम सीएनआरआई के सिविल सोसाइटी रेजिलिएंस एंड नेशनल अवेयरनेस मिशन (CSRNAM) 2026 का भी हिस्सा है. यह मिशन विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप ग्रामीण समुदायों को कुशल, आत्मनिर्भर और डिजिटल रूप से सक्षम बनाने पर केंद्रित है. इसके तहत महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों, किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने, जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने में सक्षम ग्रामीण समुदायों और समावेशी विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है.

आगे और बैच शुरू करने की योजना

सीएनआरआई महिला प्रकोष्ठ की चेयरमैन शोभा यादव ने कहा कि महिलाएं कार्यक्रम में किसान के रूप में आई थीं और अब उद्यमी के रूप में आगे बढ़ रही हैं. उन्होंने इन महिलाओं को अपना कारोबार स्थापित करने के दौरान सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई. सीएनआरआई के महासचिव और वर्ल्ड कोऑपरेशन इकोनॉमिक फोरम के संस्थापक एवं कार्यकारी अध्यक्ष बिनोद आनंद ने कहा कि मजबूत ग्रामीण समुदाय एक मजबूत राष्ट्र की नींव हैं. 

आयोजकों ने कहा कि आने वाले समय में फ्लाईसखी के और बैच शुरू करने की योजना है. प्रशिक्षित महिलाओं को लोन, सहकारी संस्थाओं, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों और ड्रोन सेवाओं की मांग से जोड़ने पर काम किया जाएगा. दीर्घकालिक लक्ष्य ग्रामीण भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले ड्रोन सेवा उद्यमों का नेटवर्क तैयार करना है, ताकि महिलाएं कृषि तकनीक के इस्तेमाल के साथ उससे जुड़े कारोबार में भी अपनी भूमिका मजबूत कर सकें.

कार्यक्रम में कई संस्थानों के अधिकारी हुए शामिल

कार्यक्रम में टीआईएचएएन, आईआईटी हैदराबाद के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर संतोष रेड्डी ने अतिथियों का स्वागत किया. शोभा यादव ने अतिथियों का अभिनंदन करने के साथ फ्लाईसखी कार्यक्रम की यात्रा प्रस्तुत की. नाबार्ड के बैंकर्स इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट (BIRD) के निदेशक डॉ. निरुपम मेहरोत्रा ने ऑनलाइन मुख्य संबोधन दिया.

इस मौके पर टीआईएचएएन, आईआईटी हैदराबाद की प्रमुख प्रो. राजलक्ष्मी, सिंजेंटा इंडिया में सस्टेनेबिलिटी एंड कॉरपोरेट अफेयर्स की प्रमुख डॉ. संगीता डावर मेंदिरत्ता, सीएनआरआई के सह-अध्यक्ष और इंडो-पैसिफिक चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के संस्थापक अध्यक्ष विश्वास त्रिपाठी, सिंजेंटा इंडिया के इनोवेशन सेंटर की प्रमुख गुयेन थी माई ची, सिंजेंटा के डिवीजन मैनेजर चंद्रशेखर अय्यागड्डी और वॉव ग्रीन के प्रमुख डॉ. शंकर गोयनका ने भी संबोधन दिया. कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षित महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए, जिसके बाद उन्हें प्रमाणपत्र प्रदान किए गए.

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