उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में फसलों की बर्बादी से बढ़ी चिंता, महिला किसान संगठनों ने उठाई ये मांगें

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में फसलों की बर्बादी से बढ़ी चिंता, महिला किसान संगठनों ने उठाई ये मांगें

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और जंगली जानवरों से फसलों को हो रहे नुकसान के बीच महिला किसान संगठनों ने राज्य सरकार से मुआवजे की मांग की है.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Oct 18, 2026,
  • Updated Oct 18, 2026, 2:56 PM IST

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और जंगली जानवरों से फसलों को हो रहे नुकसान ने खेती-किसानी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. इससे परेशान महिला किसानों ने राज्य सरकार से फसल नुकसान का मुआवजा देने और बदलते मौसम के कृषि पर पड़ रहे असर का व्यापक अध्ययन कराने की मांग की है. महिला किसान संगठनों ने शुक्रवार को डीडीहाट की उप जिलाधिकारी खुशबू पांडे के माध्यम से राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा. इसमें मौसम के बदलते मिजाज, बेमौसम और अत्यधिक बारिश और ओलावृष्टि से खेती पर पड़ रहे प्रभावों का आकलन करने के लिए व्यापक अध्ययन कराने की मांग की गई. संगठनों ने कृषि और जंगलों पर निर्भर समुदायों की आजीविका पर पड़ रहे असर को भी अध्ययन में शामिल करने की अपील की.

जंगली जानवरों के बाद ओलावृष्टि ने बढ़ाई परेशानी

ज्ञापन सौंपने से पहले एक सम्मेलन में एक्शनएड, पहल सोसाइटी और महिला किसान अधिकार मंच से जुड़ी महिला किसानों ने हिस्सा लिया. सम्मेलन में बेमौसम बारिश, बदलते मौसम और स्थानीय जंगलों में घास की प्रजातियों में आ रहे बदलावों पर चर्चा की गई.

महिला किसानों का कहना है कि जंगली जानवरों के कारण पहले से ही पारंपरिक फसलों को नुकसान पहुंच रहा था. इस साल बेमौसम ओलावृष्टि ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. लगातार अलग-अलग कारणों से फसलें प्रभावित होने के चलते खेती को आजीविका के रूप में जारी रखना कठिन होता जा रहा है.

खेती जारी रखने के लिए मुआवजे की मांग

महिला किसान अधिकार मंच की डीडीहाट संयोजक खीमा जेठी ने कहा कि पारंपरिक फसलों को जंगली जानवरों से पहले ही नुकसान हो रहा था, लेकिन इस साल बेमौसम ओलावृष्टि ने समस्या को और गंभीर बना दिया है. 

उन्होंने कहा कि कई कारणों से फसलों को हुए व्यापक नुकसान के कारण खेती-किसानी जारी रखना मुश्किल हो गया है. खीमा जेठी ने कहा कि महिला किसान संगठनों ने राज्य सरकार से नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा देने की मांग की है, ताकि किसान खेती को अपना पेशा बनाए रख सकें.

स्थानीय घास और औषधीय पौधों के संरक्षण पर जोर

तीनों संगठनों ने स्थानीय प्रजातियों की घास, झाड़ियों और जड़ी-बूटियों को संरक्षित करने के लिए भी ठोस कदम उठाने की मांग की है. खीमा जेठी ने कहा कि इन स्थानीय वनस्पतियों का संरक्षण पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्थानीय जंगलों को बचाने में भी मददगार होगा.

महिला किसान संगठनों ने राज्य सरकार से मौसम में हो रहे बदलावों और प्राकृतिक संसाधनों पर उनके प्रभाव को गंभीरता से लेते हुए कृषि पर निर्भर परिवारों की आजीविका सुरक्षित करने के लिए जरूरी कदम उठाने की अपील की है. (पीटीआई)

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