
जामनगर के रणजीतनगर में ‘विकसित भारत संकल्प सम्मेलन’ के अंतर्गत प्राकृतिक कृषि परिसंवाद एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम जिला प्रशासन, कृषि विभाग और आत्मा (ATMA) ATMA के देख-रेख में आयोजित हुआ. कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना रहा.
कार्यक्रम में जामनगर और आसपास के क्षेत्रों से 600 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया. किसानों ने पूरे उत्साह के साथ प्राकृतिक खेती से जुड़ी जानकारियाँ प्राप्त कीं और विशेषज्ञों से संवाद किया.
इस अवसर पर किसानों को प्राकृतिक खेती के महत्व, कम लागत वाली खेती की तकनीकों तथा रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के विकल्पों के बारे में विस्तार से बताया गया. विशेषज्ञों ने सरल तरीके से समझाया कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है और उत्पादन भी बेहतर होता है.
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को भूमि की उर्वरता बनाए रखने, जैविक संसाधनों के उपयोग और आधुनिक प्राकृतिक खेती तकनीकों को अपनाने की सलाह दी. साथ ही कम खर्च में अधिक उत्पादन प्राप्त करने और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया गया.
कार्यक्रम में बताया गया कि गुजरात सरकार ने वर्ष 2019 से प्राकृतिक खेती अभियान को गति दी है. राज्य में प्राकृतिक खेती विकास बोर्ड की स्थापना की गई है. वर्तमान में 9 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं, जबकि जामनगर जिले में 9 हजार से अधिक किसान रसायनमुक्त खेती की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
कार्यक्रम के दौरान कई प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे अन्य किसानों को प्रेरणा मिली. साथ ही प्रदर्शनी में प्राकृतिक खेती से जुड़े मॉडल, जैविक उत्पाद और आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया गया. कार्यक्रम के अंत में किसानों को आत्मनिर्भर, टिकाऊ और पर्यावरण हितैषी खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया. इसे क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. (दर्शन ठक्कर की रिपोर्ट)
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