हरियाणा ने 50 प्रतिशत तक कम किए पराली जलाने के मामले, पिछड़ गया पड़ोसी राज्‍य पंजाब

हरियाणा ने 50 प्रतिशत तक कम किए पराली जलाने के मामले, पिछड़ गया पड़ोसी राज्‍य पंजाब

हरियाणा और पंजाब दोनों राज्‍य ऐसे हैं, जहां ज्‍यादातर किसान खरीफ सीजन में धान की बुवाई करते हैं, जिससे यहां पराली का प्रबंधन थोड़ा मुश्किल हो जाता है और किसान खेत में आग लगा देते हैं. हरियाणा राज्य कृषि आयोग (HARSAC) के मुताबिक, हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में बहुत कमी देखने को मिली है.

हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में कमी (फाइल फोटो)हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में कमी (फाइल फोटो)
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Nov 26, 2024,
  • Updated Nov 26, 2024, 2:02 PM IST

दिल्‍ली-एनसीआर, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में हर साल सर्दियों के दिनों में प्रदूषण से हवा की गुणवत्‍ता बुरी तरह प्रभाव‍ित होती है, जिससे लोगों का सांस लेना भी दूभर हो जाता है. पराली जलाने की घटनाएं स्‍थानीय स्‍तर पर हवा को बड़े पैमाने पर प्रदूष‍ित तो करती ही हैं, लेकिन लंबे समय से पंजाब हरि‍याणा और उत्‍तर प्रदेश के किसानों द्वारा पराली जलाने की घटनाओं को दिल्‍ली में प्रदूषणा के लिए जिम्‍मेदार ठहराया जाता रहा है. हालांकि, अब इसमें भी एक नया दृष्टिकोण सामने निकलकर आ रहा है.

इस बीच, पराली जलाने की घटनाओं के मामले में हरियाणा को लेकर सकारात्‍मक खबर सामने आई है. यहां पिछले कुछ सालों के मुकाबले पराली जलाने के मामलों में देखने लायक गिरावट दर्ज की गई है. ‘दि ट्रिब्‍यून’ की रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा राज्य कृषि आयोग (HARSAC) ने पराली जलाने के आंकड़े जारी किए है. इन आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल 24 नवंबर तक हरियाणा में पराली जलाने की 2,278 घटनाएं सामने आई थीं, जबकि‍ इस साल पराली जलाने की घटनाएं कम होकर 1,315 रह गईं.

इन कारणों से कम हुए मामले

सुप्रीम कोर्ट के पराली जलाने पर बैन को लेकर सख्‍ती, कानूनी कार्रवाई, रेड एंट्री जैसी सख्‍ती, केंद्र और राज्‍य सरकार की योजनाओं के साझा प्रयासों और पर्यावरण पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों को देखते हुए यहां के किसान पराली जलाने से बच रहे हैं. पराली आग की घटनाओं को एक नजर देखें तो इस बार हरियाणा के कई जिले ऐसे हैं जहां एक भी मामला सामने नहीं आया है. वहीं, कुछ जिलों में नाम मात्र घटनाएं सामने आई हैं.

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इस साल गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, मेवात, चरखी-दादरी, रेवाड़ी में पराली जलाने की एक भी घटना सामने नहीं आई है. वहीं, भिवानी में 7 और झज्जर में 11 घटनाएं दर्ज की गई हैं. इसके उलट पंजाब में इस साल भी पराली जलाने की घटनाएं बड़ी संख्‍या में दर्ज की गई हैं. अकेले संगरूर जिले में 1,721 पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं. ये घटनाएं हरियाणा में दर्ज किए कुल मामलों से भी काफी ज्‍यादा हैं.

पराली प्रबंधन कर रहे किसान

बता दें कि इस साल हरियाणा में डेढ़ लाख से ज़्यादा किसानों ने सरकारी पोर्टल पर पराली प्रबंधन का रजिस्‍ट्रेशन कराया है. कुरुक्षेत्र के 20,169 किसान, कैथल के 18,680 और करनाल में 13 हजार से ज्‍याद किसान पराली प्रबंधन के लिए रजिस्‍ट्रेशन करा चुके हैं.

फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सरकार किसानों को प्रति एकड़ एक हजार रुपये सब्सिडी देती है, जिसका लाभ लेने के लि‍ए किसानों ने आवेदन दिए है. बता दें कि हरियाणा में 15 सितंबर 2024 से 24 नवंबर 2024 पराली जलाने की सबसे ज्‍यादा घटनाएं जींद में 201, कैथल में 194, सिरसा में 147, कुरूक्षेत्र में 131 और फतेहाबाद में 129 सामने आई हैं.

हरियाणा और पंजाब में पांच सालों में पराली जलाने की घटनाओं में आई कमी की तुलना…

हरियाणा में साल 2020 में 4,036 पराली जलाने की घटनाएं सामने आई थी, जो 2021 में बढ़कर 6,829 हो गईं. 2022 में एक बार फिर मामलों में गिरावट देखी गई और   3,581 मामले सामने आए. साल 2023 में मामले और घटे तो संख्‍या 2278 पर पहुंची. वहीं, इस साल अब तक 1315 घटनाएं सामने आई हैं.

पंजाब में साल 2020 में पराली आग की 82,702 घटनाएं दर्ज की गईं, 2021 में 71,215 घटनाएं, 2022 में 49,810 घटनाएं, 2023 में 36,514 घटनाएं दर्ज की गईं. वहीं, अब 2024 में 15 स‍ितंबर से अब तक 10,682 मामले दर्ज किए जा चुके हैं.

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