
अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में धान उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार के मकसद से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के केंद्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान (CIARI) ने एक नई धान किस्म ‘दीप धान 10’ (ANR-40) विकसित की है. वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों के लिए तैयार की गई इस किस्म को वर्ष 2025 में आधिकारिक रूप से जारी किया गया है.
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार ‘दीप धान 10’ विशेष रूप से अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के वर्षा आधारित निचले क्षेत्रों की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित की गई है. यह किस्म किसानों को अधिक उत्पादन देने के साथ-साथ रोगों से सुरक्षा और बेहतर बाजार मूल्य दिलाने में भी मदद करेगी.
ICAR से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ANR-40 (CIARI Dhan 10) एक लंबी अवधि वाली धान प्रजाति है जिसकी फसल लगभग 135 दिनों में तैयार होती है. इस किस्म का विकास वर्ष 2020 में जीएसटी एवं आरएफएलएल नर्सरी लाइन HHZ 4-DT3-V1-Y1 से किया गया था. पांच वर्षों के परीक्षण और मूल्यांकन के बाद इसे वर्ष 2025 में किसानों के लिए जारी किया गया.
संस्थान के अनुसार ‘दीप धान 10’ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी उच्च उत्पादकता है. वर्षा आधारित निचले क्षेत्रों में यह किस्म 5.5 से 6.0 टन प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने में सक्षम है. इससे सीमित संसाधनों वाले किसानों को अधिक उपज हासिल होगी और उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी.
नई किस्म में बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (BLB) जैसे महत्वपूर्ण रोग के प्रति मध्यम स्तर की प्रतिरोधक क्षमता पाई गई है. इससे किसानों को रोग प्रबंधन पर कम खर्च करना पड़ेगा और उत्पादन में नुकसान का जोखिम भी घटेगा.
‘दीप धान 10’ में कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे अन्य किस्मों से अलग बनाती हैं.
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे कद के पौधे और गिरने के प्रति सहनशीलता किसानों के लिए कटाई प्रक्रिया को आसान बनाती है और प्रतिकूल मौसम में भी उत्पादन स्थिर बनाए रखने में मदद करती है.
उपभोक्ताओं को भी मिलेगा लाभ
यह किस्म केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है. इसके दानों की क्वालिटी, मिलिंग रिकवरी और खाने के गुण स्थानीय उपभोक्ताओं की पसंद को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं. बेहतर चावल क्वालिटी से किसानों को बाजार में बेहतर मूल्य मिलने की संभावना भी बढ़ेगी.
संस्थान की ओर से दक्षिण अंडमान और उत्तर-मध्य अंडमान के जिलों में लगभग 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इस किस्म का प्रदर्शन और विस्तार किया गया है. शुरुआती रिजल्ट उत्साहजनक बताए जा रहे हैं, जिसके बाद इसे बड़े पैमाने पर किसानों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है.
‘दीप धान 10’ के प्रमुख लाभार्थियों में किसान, कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) शामिल हैं. किसानों को अधिक उत्पादन और आय बढ़ाने का अवसर मिलेगा, जबकि कृषि विभाग को द्वीपों में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी. साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र इस तकनीक के प्रसार और प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि ‘दीप धान 10’ का बड़े स्तर पर विस्तार किया जाता है तो अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की वर्षा आधारित धान खेती में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. उच्च उपज, बेहतर क्वालिटी और रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण यह किस्म आने वाले वर्षों में द्वीपीय किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकती है.