भारत में मानसून को लेकर एल नीनो की चर्चा तेज हो गई है। मौसम विशेषज्ञ देवेंद्र त्रिपाठी के अनुसार, 'जून, जुलाई और अगस्त में एल नीनो होने की संभावना लगभग 40 प्रतिशत है', जो मानसून को कमजोर कर सकती है। यदि एल नीनो का प्रभाव बढ़ता है, तो खरीफ फसलों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ेगा। वर्तमान में समुद्र की सतह का तापमान ला नीना से न्यूट्रल की ओर बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में एल नीनो की स्थिति बन सकती है। हालांकि, इंडियन ओशन डायपोल (IOD) के पॉजिटिव होने पर एल नीनो के बावजूद अच्छी बारिश की उम्मीद रहती है। इसके अलावा, देश के कई हिस्सों में तापमान में बढ़ोतरी और बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। उत्तर भारत में 22 फरवरी से मौसम में बदलाव और मार्च की शुरुआत में नए पश्चिमी विक्षोभ की संभावना जताई गई है।
threat of El Nino looms over monsoon farmers suffer drought this year
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