कुश की नगरी सुल्तानपुर में पहुंचा ‘किसान कारवां’, किसानों ने सीखा उन्नत खेती का तरीका

कुश की नगरी सुल्तानपुर में पहुंचा ‘किसान कारवां’, किसानों ने सीखा उन्नत खेती का तरीका

इस विशेष अभियान के तहत 75 जिलों की कवरेज में सुल्तानपुर 34वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से खेती से जुड़ी नई तकनीकों और योजनाओं की जानकारी प्राप्त की.

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कुश की नगरी सुल्तानपुर में पहुंचा ‘किसान कारवां’, किसानों ने सीखा उन्नत खेती का तरीकासुल्तानपुर में पहुंचा ‘किसान कारवां’

भगवान श्रीराम के पुत्र कुश की नगरी सुल्तानपुर में किसान कारवां पहुंचा. उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे के संयुक्त प्रयास से प्रदेश के 75 जनपदों में यह किसान कारवां आयोजित किया जा रहा है. इस विशेष अभियान के तहत 75 जिलों की कवरेज में सुल्तानपुर 34वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से खेती से जुड़ी नई तकनीकों और योजनाओं की जानकारी प्राप्त की.

कृषि यंत्रीकरण और फार्मर रजिस्ट्री की जानकारी

किसान कारवां के पहले चरण में सहायक विकास अधिकारी संजय यादव ने किसानों को कृषि यंत्रीकरण योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सरकार छोटे से लेकर बड़े कृषि यंत्रों पर सब्सिडी दे रही है. कई योजनाओं में एक करोड़ रुपये तक के कृषि यंत्र किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिन पर 60 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलती है. उन्होंने फार्मर रजिस्ट्री के बारे में भी बताया और कहा कि इसके माध्यम से हर किसान की एक अलग पहचान बनेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा.

कीट नियंत्रण के लिए सोलर ट्रैप का प्रयोग

दूसरे चरण में सहायक विकास कृषि रक्षा अधिकारी अब्दुल उस्मान ने बताया कि रासायनिक खाद के अत्यधिक उपयोग से कीटों का प्रकोप बढ़ रहा है. इससे फसलों को बचाने के लिए कृषि रक्षा इकाई द्वारा सोलर ट्रैप और अन्य ट्रैप उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिन पर सब्सिडी भी दी जा रहा है. सोलर ट्रैप दिन में चार्ज होकर रात में कीटों को आकर्षित करता है और उन्हें फंसा लेता है, जिससे फसल की सुरक्षा होती है.

बेहतर उत्पादन के लिए सही सिंचाई जरूरी

तीसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के फसल वैज्ञानिक डॉ. ए.के. सिंह ने उन्नत बीज और सिंचाई प्रबंधन पर जानकारी दी. उन्होंने बताया कि गेहूं की DBW-87 किस्म 80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दे सकती है, लेकिन जानकारी के अभाव में किसान इसका पूरा लाभ नहीं ले पा रहे हैं. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि दो सिंचाई की सुविधा वाले किसान 25 और 85 दिन पर सिंचाई करें, जबकि तीन सिंचाई वाले किसान 25, 65 और 105 दिन पर सिंचाई करें.

पशुपालन से बढ़ सकती है किसानों की आय

चौथे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. गौरव पांडे ने पशुपालन के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि पशुओं को संतुलित पोषण देने के लिए मिनरल और प्रोटीन युक्त “मिनरल चॉकलेट” तैयार की जा सकती है. यह ईंट जैसी खुराक पशु धीरे-धीरे चाटते हैं, जिससे दूध उत्पादन में 2 से 3 किलो तक की वृद्धि हो सकती है.

नंदिनी योजना से देसी गाय पालन को बढ़ावा

पांचवें चरण में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. चंद्रसेन गुप्ता ने बताया कि सरकार देसी गायों के संवर्धन के लिए नंदिनी और मिनी नंदिनी योजना चला रही है. मिनी नंदिनी योजना के तहत 10 देसी गायों के पालन के लिए लगभग 23.5 लाख रुपये की परियोजना है, जिसमें 11.80 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है. इस योजना का लाभ लेने के लिए पशुपालकों को नंद बाबा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होता है.

महिला समूहों से जुड़ने के फायदे बताए

छठे चरण में जादूगर सलमान ने जादू के माध्यम से महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के फायदे बताए. उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ने पर महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बनती हैं और उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिलता है.

लकी ड्रा में किसानों को मिले पुरस्कार

कार्यक्रम के अंत में लकी ड्रा का आयोजन किया गया. इसमें 500 रुपये के 10 पुरस्कार दिए गए. प्रथम पुरस्कार सुखमति देवी ने 3000 रुपये और द्वितीय पुरस्कार राम लखन मौर्य ने 2000 रुपये जीते.

किसान कारवां पहल का मकसद

किसान कारवां यह कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक लंबी और सार्थक यात्रा है, जो 29 दिसंबर 2025 से शुरू होकर मई 2026 के अंत तक प्रदेश भर के सभी 75 जिलों तक पहुंचेगी. किसान तक का किसान कारवां यूपी के हर जिले में पहुंचकर किसानों, ग्राम प्रधानों, प्रगतिशील किसानों और महिला किसानों को एक साझा मंच देगा. यहां खेती से जुड़ी नवीनतम तकनीकों की जानकारी मिलेगी, सरकारी योजनाओं को सरल भाषा में समझाया जाएगा और उन सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं पर चर्चा होगी, जो आज के समय में किसानों के लिए वास्तव में उपयोगी हैं.

हमारे इस किसान कारवां में हर पड़ाव पर होंगे विशेषज्ञों के व्याख्यान, आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों की प्रदर्शनियां, प्रशिक्षण सत्र और किसान गोष्ठियां. साथ ही, उन प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने नवाचार, मेहनत और समझदारी से खेती को एक नई दिशा दी है. किसानों के लिए यह मंच अनुभव साझा करने का भी होगा और सीखने का भी.

Frequently Asked Questions (FAQs)

1. किसान कारवां क्या है?
किसानों से सीधे जुड़ने वाला किसान तक का विशेष कृषि अभियान.

2. किसान कारवां का उद्देश्य क्या है?
किसानों की समस्याएं, समाधान और नई जानकारी सामने लाना.

3. किसान कारवां किन जगहों पर हो रहा है?
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में.

4. किसान कारवां किन किसानों के लिए है?
छोटे, सीमांत, युवा, महिला और प्रगतिशील किसान-सभी के लिए.

5. किसान कारवां में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?
खेती, लागत घटाने के तरीके, तकनीक और योजनाओं की जानकारी.

6. क्या किसान अपनी समस्या सीधे बता सकते हैं?
हां, किसान अपनी बात सीधे मंच पर रख सकते हैं.

7. क्या इसमें भाग लेने के लिए शुल्क है?
नहीं, किसानों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है.

8. किसान कारवां की जानकारी कहां मिलेगी?
किसान तक के सोशल मीडिया हैंडल और यूट्यूब चैनल  https://www.youtube.com/@kisantakofficial पर

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