कर्नाटक के किसानों के लिए बड़ी राहतकर्नाटक सरकार सूखे से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है. राज्य के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने विधानसभा में ऐलान किया कि सूखा प्रभावित इलाकों के हर किसान को 2,500 रुपये की इनपुट सब्सिडी दी जाएगी. इस मदद पर राज्य सरकार करीब 1,250 करोड़ रुपये खर्च करेगी. सरकार ने यह फैसला केंद्र से मिलने वाली राहत राशि का इंतजार किए बिना लेने की बात कही है.
विधानसभा में सूखे की स्थिति पर चर्चा का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने केंद्र से 3,800 करोड़ रुपये की राहत मांगी है. दरअसल, राज्य के 101 तालुकों में सूखे से करीब 18,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है. उन्होंने कहा कि 50 और तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किए जाने की संभावना है. जमीन पर स्थिति की जांच के बाद सूखा प्रभावित तालुकों की संख्या 220 तक पहुंच सकती है. परमेश्वर ने केंद्र सरकार से कर्नाटक के सूखे को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और स्थिति का जायजा लेने के लिए केंद्रीय टीम भेजने की भी मांग की.
उपमुख्यमंत्री के मुताबिक, कर्नाटक में इस साल 1 जून से 23 सितंबर के बीच सामान्य तौर पर 809 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस दौरान केवल 524 मिमी बारिश हुई. यानी राज्य में सामान्य से करीब 36 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई. कम बारिश का सीधा असर खेती पर पड़ा है. राज्य में 84.14 लाख हेक्टेयर में बुआई का लक्ष्य था, लेकिन केवल 68.67 लाख हेक्टेयर में ही खेती हो सकी. इसी तरह बागवानी फसलों की खेती का अनुमान 4.36 लाख हेक्टेयर था, लेकिन सिर्फ 3.78 लाख हेक्टेयर में खेती हुई. परमेश्वर ने कहा कि कई जगह किसानों ने फसल बोई, फसल अंकुरित हुई और उसमें दो पत्तियां भी आईं, लेकिन बारिश नहीं होने के कारण फसल बाद में सूख गई.
सूखे के कारण सिर्फ फसलें ही प्रभावित नहीं हुई हैं, बल्कि कई इलाकों में पीने के पानी और पशुओं के चारे की भी समस्या पैदा हो गई है. सरकार के मुताबिक, फिलहाल 111 तालुकों और 531 गांवों में पीने के पानी की समस्या है. सरकार का कहना है कि सूखे से खेती और बागवानी दोनों फसलों को नुकसान हुआ है. वहीं, आने वाले समय में नए क्षेत्रों को भी सूखा प्रभावित घोषित किया जा सकता है.
इसके अलावा सूखा प्रभावित किसानों को कर्ज के बोझ से राहत देने के लिए सरकार ने लोन की अदायगी और मोरेटोरियम की अवधि भी बढ़ाई है. इसके तहत किसानों को कर्ज चुकाने के लिए 12 महीने का अतिरिक्त समय दिया गया है. इससे कर्ज चुकाने की कुल अवधि 36 महीने से बढ़कर 60 महीने हो गई है. परमेश्वर ने यह भी कहा कि अगर माइक्रोफाइनेंस कंपनियां किसानों को कर्ज वसूली के नाम पर परेशान करती हैं, तो उनके खिलाफ मौजूदा कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी.
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि इस साल राज्य में फसल बीमा के लिए 49 लाख किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या बताई गई है. राज्य सरकार फसल बीमा के लिए अपना करीब 1,572 करोड़ रुपये का योगदान भी पूरा करेगी. उन्होंने बताया कि 11 सितंबर तक राज्य में बिजली की मांग बढ़कर 20,000 मेगावाट तक पहुंच गई थी. इसके बावजूद सरकार किसानों को छह घंटे बिजली की आपूर्ति जारी रखे हुए है.
परमेश्वर ने केंद्र से मिलने वाली आपदा राहत राशि को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि फंड के बंटवारे में कर्नाटक के साथ भेदभाव किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग के तहत राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष से कर्नाटक को 929 करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन अभी तक उसे 464 करोड़ रुपये ही मिले हैं. परमेश्वर के मुताबिक, पिछले पांच साल में महाराष्ट्र को इसी व्यवस्था के तहत 39,492 करोड़ रुपये, जबकि कर्नाटक को 8,559 करोड़ रुपये मिले हैं. उन्होंने केंद्र से कर्नाटक को भी उचित राहत देने की मांग की. उपमुख्यमंत्री ने मौजूदा स्थिति को 'ऐतिहासिक सूखा' बताते हुए केंद्र से जल्द केंद्रीय टीम भेजने और इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की अपील की. (PTI)
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