गेहूं खरीद को लेकर किसानों का विरोध-प्रदर्शन (सांकेतिक तस्वीर)राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीद को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है. शनिवार काे सैकड़ों की संख्या में किसान सड़कों पर उतरे और खरीद व्यवस्था में गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया. किसानों का कहना है कि तय व्यवस्था के बावजूद पर्याप्त मात्रा में गेहूं की खरीद नहीं हो रही है, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. प्रदर्शन कर रहे किसानों ने सरकार से गेहूं खरीद का कोटा बढ़ाने की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जिन किसानों ने पहले से खरीद प्रक्रिया के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है, उन्हें प्राथमिकता दी जाए. साथ ही खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी स्तर पर पक्षपात या अव्यवस्था की गुंजाइश न रहे.
किसानों ने आरोप लगाया कि खरीदी के दौरान तौल और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर भी कई तरह की समस्याएं हैं. किसानों ने मांग उठाई कि पूरी व्यवस्था को साफ और जवाबदेह बनाया जाना चाहिए, ताकि किसानों को समय पर भुगतान मिल सके और उन्हें बार-बार अधिकारियों के चक्कर न लगाने पड़ें.
अपनी मांगों को लेकर किसान ट्रैक्टर काफिले के साथ गंगासिंह चौक पहुंचे और नारेबाजी की. स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने प्रदर्शन स्थल के आसपास बैरिकेडिंग की और किसानों को कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने से रोका. कुछ समय तक तनाव की स्थिति बनी रही, लेकिन बाद में किसान नेताओं और प्रशासन के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ.
प्रदर्शन से पहले किसानों ने गुरुद्वारा सिंह सभा में बैठक कर आगे की रणनीति तैयार की. किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि लंबे समय से शिकायतें उठाने के बावजूद समाधान नहीं निकला है. उन्होंने कहा अगर जल्द मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को आगे और तेज किया जाएगा.
बता दें कि इससे पहले, हनुमानगढ़ में भी गेहूं खरीद को लेकर किसानों की नाराजगी देखने को मिली थी. जिले में 30 मई को बड़ी संख्या में किसानों ने खरीद अवधि और खरीद लक्ष्य बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन किया था. पीलीबंगा में किसानों ने बैठक के बाद विरोध प्रदर्शन तेज करते हुए रेल मार्ग तक कूच कर पटरी ब्लॉक कर दी थी. किसानों ने आरोप लगाया था कि मंडियों में भारी मात्रा में गेहूं की आवक होने के बावजूद खरीद की रफ्तार धीमी है. हालांकि, इसके बाद प्रशासन और किसान संगठनों के बीच बातचीत हुई और आश्वासन के बाद किसान रेलवे ट्रैक से हट गए थे. (पीटीआई)
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