
उत्तर प्रदेश के किसानों से सीधे संवाद करने और उनकी समस्याओं को समझने के लिए शुरू हुआ किसान कारवां 2.0 अब मेरठ पहुंच गया है. 24 सितंबर को आईआईएमटी विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में पश्चिमी यूपी की क्षेत्रीय किसान महासभा आयोजित हुई. इसमें बड़ी संख्या में किसानों ने हिस्सा लिया.

कार्यक्रम की शुरुआत करीब 10 बजे हुई. किसानों के मनोरंजन के साथ खेती की जानकारी देने के लिए जादूगर सलमान ने खास प्रस्तुति दी. उन्होंने जादू के जरिए खेती से जुड़े कई संदेश आसान और मजेदार तरीके से किसानों तक पहुंचाए. किसानों ने तालियों के साथ उनका उत्साह बढ़ाया.

पश्चिमी यूपी बासमती धान के लिए जाना जाता है. किसान कारवां में ‘बासमती के बादशाह—खुशबू से बाजार तक’ विषय पर चर्चा हुई. इसमें किसानों को बेहतर बाजार, मजबूत सप्लाई चेन और सीधे एक्सपोर्ट से जुड़ने की संभावनाओं के बारे में बताया गया. हापुड़ को बासमती के संभावित मॉडल हब के रूप में विकसित करने पर भी बात हुई.

पश्चिमी यूपी में गन्ना किसानों की आय का बड़ा आधार है. लेकिन गन्ना भुगतान, फसल रोग और सूखी पत्तियों के प्रबंधन जैसी समस्याएं भी हैं. किसान महासभा में इन मुद्दों पर विशेषज्ञों, किसानों और किसान नेताओं ने चर्चा की और समाधान के रास्तों पर बात की.

गन्ने की फसल में रेड रॉट जैसी बीमारियां किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन सकती हैं. चर्चा में रोग से बचाव, रोग प्रतिरोधी नई किस्मों और किसानों तक बेहतर तकनीक पहुंचाने पर जोर दिया गया. गन्ने की सूखी पत्तियों को मशीनों की मदद से संभालने के तरीकों पर भी बात हुई.

मौसम में बदलाव और बढ़ती लागत के बीच किसानों की फसल सुरक्षा भी जरूरी है. कार्यक्रम में फसल बीमा, प्राकृतिक खेती और नई कृषि तकनीक पर चर्चा हुई. सोलर पंप, ड्रोन और नैनो यूरिया जैसी तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने के तरीकों पर भी विशेषज्ञों ने जानकारी दी.

किसानों की भागीदारी बढ़ाने के लिए खेती-किसानी पर क्विज प्रतियोगिता भी कराई गई. किसानों ने QR कोड स्कैन करके क्विज में हिस्सा लिया. तीन क्विज में पांच-पांच किसानों को चुना गया. इस तरह कुल 15 किसानों को एक-एक हजार रुपये दिए गए. यानी किसानों ने कुल 15 हजार रुपये के पुरस्कार जीते.

मेरठ की किसान महासभा में पश्चिमी यूपी के अलग-अलग जिलों से चुने गए 10 किसानों को ‘कृषिवीर’ सम्मान दिया गया. मंजू कश्यप, ओमवीर सिंह, प्रीतम सिंह, विनोद सैनी, नीलम त्यागी, नीरजा शर्मा, श्याम सिंह, ठाकुर धर्मपाल, जुनैद फरीदी अली और विनोद पवार को प्रशस्ति पत्र और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया.

किसान कारवां 2.0 के मंच से 20 सदस्यीय किसान परिषद का गठन भी किया गया. इसमें किसान, कृषि अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक शामिल हैं. परिषद का उद्देश्य किसानों की समस्याओं और उनकी जमीनी जरूरतों को सामने लाना और उनकी बात संबंधित स्तर तक पहुंचाने में मदद करना है.

मेरठ की किसान महासभा में पश्चिमी यूपी की खेती से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. गन्ना और बासमती जैसी पारंपरिक फसलों को बेहतर बाजार, एक्सपोर्ट और आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर दिया गया. किसान कारवां 2.0 का उद्देश्य किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को समझना और समाधान की दिशा में काम करना है.
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