
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है. प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें जमीन, घर और जंगल के बदले उचित मुआवजा नहीं मिला. इसी वजह से महिलाएं और ग्रामीण अलग-अलग तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

गांधीवादी कार्यकर्ता अमित भटनागर 6 जुलाई से आमरण अनशन पर बैठे हैं. उन्होंने विरोध जताने के लिए चिता पर बैठकर सत्याग्रह शुरू किया है. उनका कहना है कि सरकार ने पहले उचित मुआवजे का भरोसा दिया था, लेकिन बाद में वादे पूरे नहीं किए गए.

आंदोलन में शामिल कई महिलाएं घंटों तक नदी में गले तक पानी में खड़ी रहकर प्रदर्शन कर रही हैं. उनका कहना है कि जब जमीन और घर ही छिन गए हैं तो अब डरने के लिए कुछ नहीं बचा. यह तस्वीरें पूरे आंदोलन का सबसे भावुक चेहरा बन गई हैं.

प्रदर्शन में शामिल समत रानी का कहना है कि उनका जीवन जंगल और खेती पर निर्भर है. उन्होंने मांग की कि उन्हें उनकी जमीन, जंगल और नदी के बदले उचित व्यवस्था और सम्मानजनक पुनर्वास दिया जाए.

ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से उन्हें महुआ, तेंदूपत्ता, लकड़ी और कई अन्य वन उत्पाद मिलते हैं. इन्हीं से उनका घर चलता है. उनका डर है कि विस्थापन के बाद उनकी आजीविका पूरी तरह खत्म हो जाएगी.

केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली नदी जोड़ो परियोजना है. इसका उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की सुविधा बढ़ाना है. सरकार का कहना है कि इससे लाखों हेक्टेयर भूमि को सिंचाई मिलेगी और करोड़ों लोगों को पानी उपलब्ध होगा.

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार इस परियोजना से छतरपुर और पन्ना जिले के कई गांव प्रभावित होंगे. इनमें बड़ी संख्या आदिवासी, बंजारा और पिछड़े वर्ग के परिवारों की है. ग्रामीणों का आरोप है कि वास्तविक प्रभावित लोगों को पूरा मुआवजा नहीं मिल रहा.

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें सिर्फ जमीन का पैसा दिया गया, लेकिन घर, पेड़, पशुशाला और दूसरी संपत्तियों का पूरा मुआवजा नहीं मिला. उनका कहना है कि पुनर्वास की प्रक्रिया भी ठीक से नहीं अपनाई गई.

कई किसानों ने दावा किया है कि उनकी सिंचित जमीन को रिकॉर्ड में असिंचित दिखा दिया गया. इससे उन्हें मिलने वाला मुआवजा काफी कम हो गया. ग्रामीणों का कहना है कि दोबारा निष्पक्ष सर्वे कराया जाना चाहिए.

प्रदर्शन में शामिल गिट्टी बाई का कहना है कि उनका घर तोड़ दिया गया और अब आंदोलन स्थल ही उनका घर बन गया है. उनका आरोप है कि महिलाओं के अधिकारों और उनके नुकसान को नजरअंदाज किया गया है.

इस परियोजना को लेकर पर्यावरणविद भी चिंता जता रहे हैं. पन्ना टाइगर रिजर्व और आसपास के जंगलों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जंगल खत्म होने से उनका जीवन भी बदल जाएगा.

छतरपुर प्रशासन का कहना है कि जिन लोगों को मुआवजे से जुड़ी शिकायत है, वे संबंधित जिले के प्रशासन के सामने अपनी शिकायत रखें. अधिकारियों ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर दोबारा सर्वे कराया जाएगा.

प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल भी तैनात किया गया. बाद में अमित भटनागर को स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया. प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today