प्याज के अच्छे दाम को लेकर किसान कई साल से लड़ाई लड़ रहे हैं. लेकिन पिछले दो साल से वो सबसे बुरा दौर देख रहे हैं. क्योंकि उन्हें 1 से लेकर 8 रुपये किलो तक का ही दाम मिल रहा है. जबकि उपभोक्ताओं को यही प्याज 30 रुपये प्रति किलो तक के दाम पर मिल रहा है. यानी प्याज उगाने और खाने वाले परेशान हैं, लेकिन किसानों की यह परेशानी बिचौलियों के लिए कमाई का अच्छा अवसर बन गई है. जब भी महंगाई की चर्चा शुरू होती है तो सरकार एक्सपोर्ट बैन कर देती है, स्टॉक लिमिट तय कर देती है और बहुत प्रेशर हो तो दूसरे देशों से प्याज का इंपोर्ट करने लगती है. लेकिन, अब जब यही प्याज एक रुपये किलो हो गया है तो पूरे सिस्टम में सन्नाटा छा गया है. व्यापारियों और मंडी समिति से जुड़े लोगों से पूछिए तो वो ऐसे तर्क दे रहे हैं कि जैसे प्याज के कम दाम के लिए किसान ही जिम्मेदार हैं.
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