57 वर्ष की उम्र में जहां लोग रिटायरमेंट की तैयारियां शुरू कर देते हैं, वहीं पुष्प नायक ने प्रबंधन (Management) से डिप्लोमा कोर्स कर यह साबित कर दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती. ग्रेड–A की स्थायी और सम्मानजनक सरकारी नौकरी होने के बावजूद उनका पढ़ाई के प्रति उत्साह कम नहीं हुआ. पुष्प नायक बताते हैं कि नौकरी के दौरान अध्ययन के बल पर करीब एक–दो दशक पहले उन्हें निजी क्षेत्र में एक करोड़ रुपये से अधिक का वार्षिक पैकेज मिल रहा था.
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