दिल्ली के लिए मुसीबत बनी पराली का इस्तेमाल करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक नायाब तरीका ढूंढ निकाला है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों ने पराली से बायो–थर्मोकोल तैयार किया है, जिसे पैकेजिंग और रूफ सीलिंग में इस्तेमाल किया जाएगा. वैज्ञानिकों का कहना है कि 15–20 दिनों में बिना किसी केमिकल के ही पराली बायो थर्मोकोल बन जाती है. साथ ही भवन निर्माण में भी पराली का इस्तेमाल करने के लिए प्रयोग जारी है. आईसीएआर के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. रमेश चंद ने बताया कि धान और गेहूं की पराली से आसानी से बायो थर्मोकोल तैयार किया जा सकता है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today