Asia की दो सबसे बड़ी ताकतें - India और China, आज एक ऐसे 'संसाधन युद्ध' में आमने-सामने हैं जहां हथियार मिसाइलें नहीं, बल्कि पानी की बूंदें हैं. विडंबना देखिए, कि जहां भारत धान (Paddy) के उत्पादन में चीन को पछाड़कर दुनिया का 'राइस किंग' बनने का जश्न मना रहा है. कीमती पानी को इथेनॉल के धुएं में उड़ाने की तैयारी कर रहा है. वहीं चीन ने अपनी चालें बदल ली हैं. चीन आज उस पानी को खेतों से खींचकर अपनी 'हाई-टेक लैब' और 'सेमीकंडक्टर प्लांट' में झोंक रहा है, क्योंकि उसने समझ लिया है कि जिस पानी से एक किलो चावल पैदा होता है, उसी से अगर एक चिप (Chip) बनाई जाए, तो उसकी आर्थिक कीमत हजारों गुना बढ़ जाती है. यह मुकाबला सिर्फ खेती का नहीं, बल्कि इस बात का है कि भविष्य की प्यासी दुनिया में कौन अपनी बूंदों को 'अनाज' बनाकर सड़ाएगा और कौन उन्हें 'तकनीक' बनाकर दुनिया पर राज करेगा.
How is India turning water into smoke in its pursuit of rice while China weaves technology
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