Agriculture Live Blogदेश के बड़े हिस्से में अब गर्मी का असर दिखने लगा है. भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने अपने ताजा बुलेटिन में भी उत्तर-पश्चिम भारत के कई इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस ऊपर बने रहने की चेतावनी दी है. साथ ही दो कमजोर पश्चिमी विक्षोभों के असर से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में 3 और 4 मार्च को हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना है. मौसम के अलावा यहां आप अन्य कृषि से जुड़ी अपडेट पढ़ सकते हैं.
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद चावल निर्यातकों के साथ-साथ किसान भी चिंतित हो गए हैं. करनाल में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रत्न मान और अन्य किसान नेताओं ने कहा कि विश्व स्तर पर गंभीर स्थिति बनी हुई है. उनका कहना है कि लड़ाई का असर दूर तक जाता है और इसका सबसे ज्यादा प्रभाव चावल के निर्यात पर पड़ेगा. ईरान में भारत, खासकर हरियाणा का बड़ा चावल व्यापार होता है, जो अब बाधित हो चुका है. किसानों के अनुसार आर्थिक असर दिखना शुरू हो गया है और अन्य आयात-निर्यात भी प्रभावित हो सकते हैं. उन्होंने यह भी चिंता जताई कि ईरान में कई भारतीय मौजूद हैं, जिससे मानवीय संकट की आशंका है. किसानों ने भारत सरकार से अपील की है कि युद्ध को जल्द रोका जाए ताकि व्यापार, आवागमन और सामान्य जीवन फिर से पटरी पर लौट सके.
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सीतापुर क्षेत्र में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित केरजू में फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए 1 करोड़ 92 लाख 82 हजार 6 रुपये की अवैध ऋण निकासी का मामला सामने आया है. प्रारंभिक जांच में इसे सुनियोजित वित्तीय अनियमितता माना गया है. संयुक्त जांच दल, जिसकी अध्यक्षता अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सीतापुर ने की, ने पाया कि किसानों को वास्तविक जानकारी दिए बिना उनके नाम पर ऋण स्वीकृत दिखाया गया और राशि का आहरण कर लिया गया. कई किसानों ने कहा कि उन्होंने न तो आवेदन किया और न ही दस्तावेज़ हस्ताक्षरित किए. जांच में तत्कालीन प्राधिकृत अधिकारी मदन सिंह, जोगी राम, सैनाथ केरकेट्टा, शाखा प्रबंधक भूपेन्द्र सिंह परिहार, सहायक लेखापाल शिवशंकर सोनी, कैशियर ललिता सिन्हा, सामान्य सहायक सुमित कुमार और कंप्यूटर ऑपरेटर दीपक कुमार चक्रधारी दोषी पाए गए. इसके आधार पर सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने संबंधित थाना में आठों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं.
अमेरिका-ईरान तनाव की बढ़ती आंच अब भारत के खाद्य तेल और उर्वरक कारोबार तक पहुंचती दिख रही है. उद्योग संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात लंबे समय तक बिगड़े रहे तो खाद्य तेल आयात, खासकर सूरजमुखी तेल, और खरीफ सीजन से पहले जरूरी उर्वरक कच्चे माल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है. मध्य पूर्व से गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर शिपिंग कंपनियों ने एहतियातन अतिरिक्त शुल्क लगाना शुरू कर दिया है. फ्रांस की कंटेनर कंपनी CMA CGM ने इस क्षेत्र से गुजरने वाले कार्गो पर प्रति कंटेनर 2,000 से 4,000 डॉलर तक का आपातकालीन कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज लागू किया है. इससे आयातकों की लागत सीधे बढ़ रही है और आगे बीमा प्रीमियम में इजाफा भी संभव माना जा रहा है. (पीटीआई)
आज के दौर में खेती के सामने सबसे बड़ी चुनौती जलवायु परिवर्तन है. बेमौसम बारिश, भीषण गर्मी और बदलता तापमान फसलों, विशेषकर गेहूं और मक्का की पैदावार पर बुरा असर डाल रहा है. इस संकट को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ एम.एल जाट ने स्पष्ट किया है कि अब पारंपरिक खेती के तरीकों में बदलाव की सख्त जरूरत है. ICAR अब ऐसी 'क्लाइमेट रेजिलिएंट' यानी जलवायु सहनशील किस्में विकसित करने पर पूरा जोर दे रहा है, जो न केवल बदलते मौसम की मार झेल सकें, बल्कि किसानों को भरपूर पैदावार भी दें. इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिकूल मौसम में भी देश का अन्न भंडार खाली न हो और किसानों की मेहनत बेकार न जाए.
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सोलापुर कृषि उत्पन्न बाजार समिति में प्याज के गिरते दामों को लेकर स्वाभिमानी शेतकरी संघटना ने आक्रामक विरोध प्रदर्शन किया. संगठन के कार्यकर्ताओं ने बाजार में ‘बोंबाबोंब’ आंदोलन छेड़कर नीलामी प्रक्रिया को रोकने की कोशिश की और प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया. किसानों का कहना है कि अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज का भाव केवल 10 से 12 रुपये प्रति किलो मिल रहा है, जबकि उत्पादन, मजदूरी, परिवहन और भंडारण पर खर्च अधिक है. प्रतिदिन लगभग 200-250 ट्रक प्याज मार्केट में आ रहे हैं, लेकिन लागत के मुकाबले कम भाव मिलने से किसानों को नुकसान हो रहा है. इस संकट के चलते किसानों ने सीधे आंदोलन का रास्ता चुना. उनके मुख्य मांगों में प्याज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹4,500 प्रति क्विंटल, किसानों को ₹3,000 प्रति क्विंटल अनुदान और नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है. व्यापारियों पर शोषण का आरोप लगाते हुए किसानों ने जोरदार नारेबाजी की और प्रदर्शन किया.
कृषि विकास और सिंचाई योजनाओं के लिए स्वीकृति: ₹27,500 करोड़
किसान कल्याण के लिए योजनाओं को मंजूरी: ₹25,678 करोड़
इस प्रकार, मंत्रिपरिषद ने किसानों के हित में कुल ₹53,178 करोड़ की योजनाओं को हरी झंडी दी है, जो कृषि और किसान कल्याण दोनों में अहम योगदान देंगी.
ईरान में चल रहे युद्ध और अमेरिका-इज़राइल के हमलों के कारण दुनिया के कई देशों के व्यापार पर असर पड़ा है. इसका असर भारत की चीनी के कारोबार पर भी देखने को मिल सकता है. आमतौर पर भारत अपनी चीनी का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों को निर्यात करता है. लेकिन अगर युद्ध के कारण वहां चीनी की मांग कम हो जाती है या भेजने में दिक्कत आती है, तो भारत से कम चीनी बाहर जाएगी. इससे देश के अंदर चीनी की उपलब्धता बेहतर हो सकती है.
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खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय बाजारों पर भी दिखने लगा है. खासकर पिस्ता, अंजीर और किशमिश जैसे सूखे मेवे महंगे हो सकते हैं. भारत बड़ी मात्रा में पिस्ता ईरान और अमेरिका के कैलिफोर्निया से आयात करता है. मौजूदा संकट के कारण ईरान से सप्लाई रुक गई है, जिससे पिस्ता के दाम बढ़ गए हैं. बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिस्ता की कीमतों में ₹40 से ₹100 प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हो चुकी है. पहले पिस्ता के दाने लगभग ₹1,500-1,600 प्रति किलो और छिलके वाला पिस्ता ₹1,200-1,300 प्रति किलो बिक रहा था, लेकिन अब इसमें तेजी देखी जा रही है.
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अलीगढ़ जनपद के इगलास क्षेत्र स्थित कलवारी गांव की पूजा चौधरी ने अपने दृढ़ निश्चय और लगातार मेहनत के दम पर यह कर दिखाया है कि कम संसाधनों के बावजूद बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है. शादी के बाद जब उन्होंने ससुराल में कदम रखा, तब परिवार दूध के छोटे व्यवसाय से जुड़ा हुआ था. पूजा ने इस कार्य को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने और बड़े स्तर पर विकसित करने का निर्णय लिया. इसके चलते पूजा ने साल 2023 में खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग से 50 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर 'शिव मिल्क प्रोडक्ट' नाम से एक डेयरी प्लांट की स्थापना की. उनके इस दूरदर्शी कदम से आज उनका वार्षिक कारोबार 80 लाख रुपये तक पहुंच चुका है.
इस डेयरी प्लांट में पनीर, घी, मावा, पाउच पैक फुलक्रीम दूध, छाछ सहित कई अन्य उत्पादों को तैयार किया जाता है। इन उत्पादों की आपूर्ति न केवल जिले में की जाती है, बल्कि मथुरा-वृंदावन तक नियमित रूप से की जा रही है.
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इस गर्मी का सीधा असर खेती पर पड़ सकता है. जम्मू और कश्मीर में गेहूँ, सरसों और सब्जियों में हल्की सिंचाई करने की सलाह दी गई है. हिमाचल प्रदेश में गेहूँ और जल्दी पकने वाली सब्जियों की सुरक्षा सिंचाई करनी चाहिए. पंजाब में सरसों, गोभी और आलू में मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए नियमित सिंचाई आवश्यक है. हरियाणा में फूल और फल देने वाले सरसों और चना की हल्की सिंचाई करनी चाहिए. उत्तराखंड में गेहूँ, मसूर, चना और सरसों की महत्वपूर्ण वृद्धि अवस्थाओं में हल्की और बार-बार सिंचाई की जानी चाहिए. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी गेहूँ, सरसों, चना, आलू और जल्दी बुवाई की गन्ना में हल्की और बार-बार सिंचाई की आवश्यकता है. राजस्थान में जीरा, इसबगोल, सरसों और चना में सुरक्षा सिंचाई करनी चाहिए. उत्तर प्रदेश में गेहूँ के दाने भरने की अवस्था, सरसों और चना में सुबह या शाम को हल्की सिंचाई करनी चाहिए. खेतों में नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग, उचित खेत किनारे बनाना और अनावश्यक जुताई से बचना चाहिए.
देश के कई हिस्सों में इस सप्ताह अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है. खासकर, उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान 4-6 डिग्री सेल्सियस और मध्य भारत में 3-5 डिग्री सेल्सियस तक सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है. मौसम विभाग के अनुसार, कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से जम्मू-कश्मीर में 4 से 8 मार्च के बीच हल्की बारिश या बर्फबारी हो सकती है. हिमाचल प्रदेश में 7 और 8 मार्च और उत्तराखंड में 8 मार्च को हल्की बारिश/बर्फबारी की संभावना है.
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