ये जमीन के अंदर में होने वाला कंद होता है. रतालू के कई तरह के किस्में होते हैं पीला, सफेद और जामूनी आदि.रतालू याम नाम से भी जाना जाता है और पौष्टिकता के आधार पर आयुर्वेद में रतालू को औषधी के रूप में प्रयोग किया जाता है. रतालू में फिनोल, फ्लेवोनोइड्स और विटामिन सी जैसे एंटीऑक्सीडेंट की मौजूदगी होती है, जो कैंसर से लड़ने में कारगर हैं. इसके साथ ही, रतालू में मौजूद विटामिन ए फेफड़े और मुंह के कैंसर से लड़ने में सहायक है. बवासीर में लाभदायक: रतालू की सब्जी बवासीर में भी राहत दिलाने में मददगार है.
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