आज भी ग्रामीण क्षेत्र में सावन महीना से लेकर भाद्र के कृष्ण जन्माष्टमी तक गांव के लोग झूले का आनंद लेते हैं,लेकिन इस तरह के नजारे आपको सभी गांव में देखने को नहीं मिलेगा. बल्कि कुछ ही गांव के एक दो पेड़ों पर झूला लगा हुआ दिखाई पड़ेगा. ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का कहना है कि आज गांव भी आधुनिक दौर के साथ आगे बढ़ते हुए पुरानी परंपराओं को पीछे छोड़ रहा है, कभी गांव में लगने वाला झूला रस्सी का हुआ करता था. वह आज साइकिल के टायर पर आकर सिमट गया है. वहीं गांव में झूला सावन महीने में ज्यादा लगता है.
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