आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय में ऐसा मॉडल तैयार किया गया है जिसके माध्यम से यहां पढ़ने वाले छात्र पढ़ाई के साथ-साथ कमाई भी करते हैं. यहां 35 एकड़ क्षेत्रफल में फसलों की बुवाई होती है. इस भूमि को 50 वर्ग मीटर के हिसाब से छात्रों को वितरित किया जाता है और फिर इसमें होने वाले उत्पादन, बीमारी से बचाव के आधार पर छात्रों को अंक प्रदान किए जाते हैं . फिर फसल लागत को निकाल कर अतिरिक्त होने वाली आय को छात्रों के बीच बांट दिया जाता है. इस तरह के मॉडल से छात्रों के भीतर प्रतियोगी भावना के साथ-साथ प्रयोग तरीके से फील्ड में काम करने की क्षमता का भी विकास होता है. इसीलिए आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए छात्र दूसरे प्रदेशों से भी पहुंचते हैं. यहां तक कि यहां विदेशी छात्र भी कृषि संबंधी कोर्सों में प्रवेश ले रहे हैं.
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