Agriculture Live Blogदक्षिण-पश्चिम मॉनसून अगले कुछ दिनों में अपनी रफ्तार बढ़ा सकता है और 23 जून 2026 के आसपास तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के अतिरिक्त हिस्सों के साथ छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों तक पहुंचने की संभावना है. दूसरी तरफ पूर्वोत्तर भारत, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार में पूरे सप्ताह कहीं-कहीं तेज बारिश देखने को मिल सकती है, जिससे मौसम में बदलाव के संकेत हैं. वहीं गर्मी से राहत सभी जगह नहीं मिलेगी, क्योंकि मध्य प्रदेश में 21 जून तक, विदर्भ में 20 जून तक, तेलंगाना में 19 जून तक लू जैसी स्थिति बने रहने का अनुमान है. यहां मौसम की खबरों के लाइव अपडेट्स के अलावा आप किसान (Farmers), खेती (Agriculture), PM Kisan Samman Nidhi Scheme, किसान आंदोलन (Farmers Protest), पशुपालन, (Animal Husbandry), कृषि तकनीक (Agriculture Technology), खाद (Fertilizer), बीज (Seeds), सरकारी योजनाएं (Government Schemes), फसलें (Crops) और किसानों की सफलता की कहानी (Farmer success story) पढ़ सकते हैं.
अधिकारियों ने बताया कि बिहार के तीन जिलों में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो गई.
शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, वैशाली में तीन लोगों की मौत हुई, जबकि नवादा और जमुई में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई.
बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इन मौतों पर शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों के लिए 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की.
देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंजीकृत निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों को वित्तीय सहायता हस्तांतरित की
भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार गुरनाम सिंह चढ़ूनी द्वारा आज चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार की जानकारियां सामने आ रही हैं, उनसे स्पष्ट है कि यह समझौता देश के किसानों, पशुपालकों, डेयरी क्षेत्र, पोल्ट्री उद्योग और भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है.
सरदार गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि फरवरी 2025 से भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताएं अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं और 23-24 जून USTR जेमिसन ग्रीर द्वारा नई दिल्ली में होने वाली बैठकों के दौरान समझौते को अंतिम रूप देने की चर्चाएं सामने आ रही हैं. किसानों को आशंका है कि इस समझौते के तहत भारत अपने कृषि बाज़ार को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अधिक खोल रहा है, जिससे करोड़ों भारतीय किसानों की आजीविका पर सीधा संकट खड़ा हो जाएगा. जब भारतीय कृषि में कंपनियां इंटर करेगी और उसके बाद जब कृषि क्षेत्र किसानों के हाथ से निकल जाएगा तो यही लोग खाद्य सामग्री को ब्लैक करेंगे जिससे खाद्य सामग्री के रेट आसमान छुएंगे और भारत के किसानों की आजीविका का साधन खत्म होने से बेरोजगारी बढ़ेगी और किसान और बेरोजगारों को आर्थिक तंगी आने की वजह से उनकी आत्महत्याएं बढ़ेंगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को दो दिन के दौरे पर पश्चिम बंगाल पहुंचेंगे, इस दौरान वे 'पश्चिमबंग दिवस' के कार्यक्रमों में शामिल होंगे, कोलकाता से 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' के मुख्य कार्यक्रम की अगुवाई करेंगे और देश में बने तीन नौसैनिक जहाजों को सेवा में शामिल करेंगे.
पड़ोसी राज्य ओडिशा से आने के बाद, मोदी दोपहर में हुगली ज़िले के तारकेश्वर में राज्य-स्तरीय 'पश्चिमबंग दिवस' समारोह में शामिल होंगे. इस कार्यक्रम में देश के निर्माण में बंगाल के ऐतिहासिक योगदान और उसकी सांस्कृतिक विरासत को दिखाया जाएगा.
मध्य पदेश राजगढ़ के पचोर मे शुक्रवार शाम हुई महज 15 से 20 मिनट की बारिश एक परिवार के लिए जिंदगीभर का दर्द छोड़ गई. पचोर के समीप स्थित गुलखेड़ी गांव में खेत पर कृषि कार्य कर रहे चाचा-भतीजे की आकाशीय बिजली गिरने से दर्दनाक मौत हो गई. हादसे के बाद पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई, वहीं अस्पताल में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया.
महाराष्ट्र के जालना जिले में किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनोखा आंदोलन किया है. भोकरदन क्षेत्र में दो किसानों ने सीधे कुएं में खाट (चारपाई) डालकर उस पर बैठते हुए प्रशासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित किया. इस अनोखे आंदोलन की चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है. आंदोलन करने वाले किसानों के नाम नारायण लोखंडे और विकास जाधव हैं. किसानों ने कुएं में खाट (चारपाई) लटकाकर उस पर बैठते हुए सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया.
देशभर में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की चाल फिलहाल सुस्त बनी हुई है. मौसम प्रणाली के अनुसार पश्चिमी तट पर मॉनसून का आगे बढ़ना पिछले 11 दिनों से रुका हुआ है, जबकि पूर्वी भारत में भी इसकी प्रगति काफी धीमी दर्ज की जा रही है. हालांकि मौसम वैज्ञानिकों ने संकेत दिए हैं कि 23–24 जून के आसपास मौसम परिस्थितियां अनुकूल हो सकती हैं, जिससे मॉनसून की आगे की प्रगति फिर से तेज हो सकती है.
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