सरहुल को प्रकृति पर्व कहा जाता है. यह झारखंड में मनाया जाता है. झारखंड में आदिवासी समुदाय के लोग इस पर्व में सरना माता की पूजा करते हैं. यह पर्व इंसानों और प्रकृति के बीच के रिश्ते और सामंजस्य को दिखाता है. इसमें पेड़ की पूजा की जाती है. साथ ही जो नए फल इस वक्त पेड़ में लगते हैं उसे प्रसाद के तौर पर रखा जाता है. यह त्योहार इसलिए खास माना जाता है क्योंकि इस त्योहार से पूरे साल के कृषि की भविष्यवाणी जुड़ी होती है. इस त्योहार में पूजा स्थल को सरनास्थल कहा जाता है. जहां पर रात में वक्त लगभग 12 बजे दो घड़ो में पानी भर कर रखा जाता है और मिट्टी के ढक्कन से ढक दिया जाता है. आप भी देखिए झारखंड में कैसे मनाया जा रहा सरहुल.
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