पहले के समय में जब सुख सुविधाएं और संसाधन नहीं हुआ करते थे.तब ग्रामीण क्षेत्र के लोग हाथों से फसल काटकर खलिहान में लेकर आते थे. खलिहान में धान या गेहूं के पौधे से अनाज अलग किया जाता था. जहां खेत के अनुसार फसल के उत्पादन की जानकारी हुआ करती थी. और किसानों को प्रति खेत के अनाज उत्पादन की पूरी जानकारी हो जाया करती थी. लेकिन मशीनें आ जाने के बाद खलिहानी की उपयोगिता खत्म सी हो गई है. इसी के साथ गांव से अब खलिहान धीरे-धीरे गायब हो रहे हैं. किसान तक की टीम बिहार के एक ऐसे ही खलिहान में पहुंची और मौजूदा हालात का जायजा लिया. देखें ये रिपोर्ट
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