नाइट्रोजन के बिना अधिकांश फसलें सही तरीके से विकसित नहीं होतीं. मकई, गेहूं और चावल के लिए नाइट्रोजन वही है जो मछली के लिए पानी है. हर साल लगभग 100 मिलियन टन से अधिक नाइट्रोजन उर्वरक के रूप में फसलों में लगाया जाता है. जिससे उन्हें मजबूत और बेहतर विकसित होने में मदद मिलती है. लेकिन समस्याएं तब उत्पन्न होती हैं जब नाइट्रोजन की बरबादी होती है. इस प्रक्रिया में हवा, पानी और जमीन तीनों प्रदूषित होती है. यह अनुमान लगाया गया है कि नाइट्रोजन डिस्चार्ज कृषि के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का एक तिहाई हिस्सा है. ऐसे में इसको रोकने या फिर कम करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं.
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