यह समझना जरूरी है कि दिवाली मनाने के लिए किसान पराली नहीं जला रहा होता है. यह किसान की मजबूरी है. बुवाई लेट होती है तो नुकसान सिर्फ किसान का नहीं बल्कि पूरे देश का होता है. धान की कमी ना सिर्फ हमारी और आपकी जेब पर भारी पड़ती है बल्कि ये देश की फूड सेक्युरिटी पर भी धावा बोलती है. और यह भी गौर करें कि इस मजबूरी के हालात के पैदा होने में किसानों की कोई गलती नहीं. दूसरे एपिसोड में देखिए ग्रीन रिवॉल्यूशन का साइड इफेक्ट.
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