गांव में आज भी बांस और तांत के सहारे नदी तालाब से मछली मारने की पुरानी तकनीक है. वहीं गांव के लोगों के पास जब कोई काम नहीं होता है. उस दौरान लोग देसी जुगाड़ से मछली मारते है.जो एक से दो घंटे के दौरान दो से तीन किलो तक मछली मार लेते है. बांस बंधे तार के निचले हिस्सा में लोहे का एक कांटी होती है. उसमें केचुआ बांधते है और उसी को खाने के लिये जब मछली आती है तो धागे में हलचल होने लगता है. और मछली पकड़ने वाला मछली पकड़ लेता है.
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