24 अक्टूबर के दिन पूरे देश में दशहरे का त्यौहार मनाया जाएगा. इस दिन रावण पुतला दहन भी किया जाता है. रावण के पुतले बनाने का काम कारीगरों द्वारा किया जाता है. हाल के दो-तीन सालों में रावण जलाने की परंपरा तेजी से बढ़ी है . पहले काशन मोहल्लों और रामलीला कमेटी के माध्यम से रावण जलाए जाते थे लेकिन अब सोसाइटी यहां तक की घरों के लिए भी छोटा रावण जलाने की परंपरा शुरू हो चुकी है . हर प्रकार के रावण को बनाने के लिए बांस का प्रयोग होता है . उत्तर प्रदेश में अभी बस की खेती व्यावसायिक रूप से नहीं हो रही है जबकि असम में बड़े पैमाने पर बस उगाया जाता है. रावण बनाने के लिए जिस तरह के बांस की जरूरत होती है वह बस असम से मंगाया जाता है
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