मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना में बड़ा विस्तारकिसानों की अगली पीढ़ी को कृषि शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में योगी सरकार ने मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ाया है. राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की इस योजना के तहत छात्रवृत्ति की निर्धारित सीटों को दोगुना कर दिया गया है. इसके साथ ही विद्यार्थियों को मिलने वाली आर्थिक सहायता में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है. इस विस्तार से प्रदेश के अधिक मेधावी किसान परिवारों को उच्च कृषि शिक्षा हासिल करने में मदद मिलेगी.
मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि संशोधित व्यवस्था के तहत प्रत्येक कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि संस्थान में छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थियों की निर्धारित संख्या 45 से बढ़ाकर 90 और प्रत्येक कृषि महाविद्यालय में 15 से बढ़ाकर 30 कर दी गई है. इस प्रकार योजना के अंतर्गत छात्रवृत्ति की कुल निर्धारित संख्या 1,410 से बढ़कर 2,820 हो गई है. वहीं, पात्र विद्यार्थियों को अब सालाना 60 हजार रुपये की छात्रवृत्ति मिलेगी.
उन्होंने बताया कि योगी सरकार की इस पहल से आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण उच्च शिक्षा में चुनौतियों का सामना करने वाले किसान और खेतिहर मजदूर परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को सहारा मिलेगा. साथ ही कृषि, उद्यान, वानिकी और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने वाले युवाओं को प्रोत्साहित कर प्रदेश में कृषि आधारित ज्ञान, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने का अवसर मिलेगा.
जितेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक, मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत छात्रवृत्ति की मासिक राशि तीन हजार रुपये से बढ़ाकर पांच हजार रुपये कर दी गई है. इसके परिणामस्वरूप चयनित विद्यार्थियों को अब सालाना 36 हजार रुपये के स्थान पर 60 हजार रुपये मिलेंगे, यानी, प्रत्येक विद्यार्थी को प्रतिवर्ष 24 हजार रुपये की अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्राप्त होगी. इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मदद मिलेगी और परिवार पर आर्थिक दबाव भी कम हो सकेगा.
योजना के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक 6,454 विद्यार्थियों को लगभग 22.90 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जा चुकी है. अब छात्रवृत्ति की निर्धारित सीटें दोगुनी होने से अधिक विद्यार्थियों को इस सहायता का लाभ पाने का अवसर मिलेगा. प्रदेश के 11 कृषि विश्वविद्यालयों एवं कृषि संस्थानों और 61 कृषि महाविद्यालयों में पात्र विद्यार्थियों को इस योजना के तहत छात्रवृत्ति दी जा रही है.
संशोधित व्यवस्था के तहत कृषि विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में कृषि स्नातक पाठ्यक्रम के लिए छात्रवृत्ति की निर्धारित संख्या 25 से बढ़ाकर 50, गृह विज्ञान स्नातक के लिए छह से बढ़ाकर 12, कृषि स्नातकोत्तर के लिए 10 से बढ़ाकर 20 और गृह विज्ञान स्नातकोत्तर के लिए चार से बढ़ाकर आठ कर दी गई है. इसी तरह कृषि महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर छात्रवृत्ति की संख्या 10 से बढ़ाकर 20 तथा स्नातकोत्तर स्तर पर पांच से बढ़ाकर 10 की गई है. कृषि के साथ उद्यान, वानिकी, पशुपालन और संबंधित विषयों में अध्ययनरत पात्र विद्यार्थी भी योजना के दायरे में आते हैं.
योजना का लाभ उत्तर प्रदेश के निवासी कृषकों एवं खेतिहर मजदूरों के पुत्र-पुत्रियों तथा उन पर पूर्ण रूप से आश्रित पात्र विद्यार्थियों को दिया जाता है. स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए यूपी बोर्ड से इंटरमीडिएट में न्यूनतम 70 प्रतिशत और अन्य बोर्ड से 85 प्रतिशत अंक निर्धारित हैं. स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए स्नातक स्तर पर कम से कम 70 प्रतिशत अंक आवश्यक हैं. विद्यार्थियों का चयन निर्धारित पात्रता और मेरिट के आधार पर किया जाता है.
मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि किसानों और खेतिहर मजदूरों के मेधावी बच्चों को उच्च कृषि शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है. छात्रवृत्ति की निर्धारित संख्या और आर्थिक सहायता में वृद्धि से आर्थिक रूप से कमजोर किसान परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने और कृषि क्षेत्र में भविष्य बनाने में मदद मिलेगी.
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