केन-बेतवा लिंक परियोजनादेश की पहली नदी जोड़ो परियोजना केन-बेतवा लिंक परियोजना (Ken-Betwa Link Project) मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की कमी को दूर करने के उद्देश्य से शुरू की गई है. इस परियोजना के तहत मध्य प्रदेश की केन नदी के पानी को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी से जोड़ने की योजना है. सरकार का दावा है कि इससे लाखों हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी, पेयजल उपलब्ध होगा और जल संकट से जूझ रहे बुंदेलखंड को बड़ी राहत मिलेगी. हालांकि, इस परियोजना को लेकर शुरुआत से ही विवाद बना हुआ है. एक ओर जहां सरकार इसे विकास की बड़ी पहल बता रही है, वहीं दूसरी ओर परियोजना से प्रभावित हजारों परिवार, खासकर आदिवासी किसान, अपनी जमीन, घर और आजीविका छिनने का आरोप लगाते हुए उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं. इसी मुद्दे को लेकर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में पिछले कई दिनों से किसानों का आंदोलन जारी था.
छतरपुर जिले के ग्राम कुपी में अंडर ब्रिज के नीचे वरान नदी के तट पर केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य परियोजनाओं से प्रभावित आदिवासी किसान पिछले 14 दिनों से धरना, चिता सत्याग्रह और जल सत्याग्रह कर रहे थे. आंदोलनकारी किसानों का कहना था कि उनकी जमीन का अधिग्रहण तो कर लिया गया, लेकिन उन्हें अब तक उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिला है. इसी मांग को लेकर किसान लगातार प्रदर्शन कर रहे थे.
आंदोलन के दौरान किसान नेता अमित भटनागर भी किसानों के साथ आमरण अनशन पर बैठे हुए थे. बताया जा रहा है कि वे लगातार 14 दिनों से भूख हड़ताल पर थे और किसानों की मांगों को लेकर प्रशासन से बातचीत की मांग कर रहे थे.
रविवार सुबह तड़के भारी संख्या में महिला और पुरुष पुलिस बल धरना स्थल पर पहुंचा. पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे आदिवासी किसानों को वहां से हटाकर आंदोलन समाप्त करा दिया. आंदोलनकारियों के अनुसार, पुलिस ने उन्हें जबरन हटाया और कई किसानों को गिरफ्तार भी किया गया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने उनकी मांगें सुने बिना आंदोलन खत्म करा दिया.
वहीं, इस पूरे मामले में छतरपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) आदित्य पटले ने प्रदर्शनकारियों के दावों को खारिज किया है. उन्होंने बताया कि किसी भी प्रदर्शनकारी को न तो गिरफ्तार किया गया और न ही हिरासत में लिया गया. उनके मुताबिक, धरना स्थल पर मौजूद अधिकांश लोग पन्ना जिले के रहने वाले थे, इसलिए उन्हें बसों में बैठाकर उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया.
एएसपी ने यह भी बताया कि किसान नेता अमित भटनागर पिछले 14 दिनों से भूख हड़ताल पर थे. उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें चिकित्सकीय जांच के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है.
प्रशासन का कहना है कि जिस अंडर ब्रिज के नीचे किसान धरना दे रहे थे, वहां निर्माण कार्य जारी है. ऐसे में किसी भी तरह की दुर्घटना या अप्रिय घटना से बचने के लिए आंदोलनकारियों को वहां से हटाया गया. प्रशासन के अनुसार, यह कदम सुरक्षा के लिहाज से उठाया गया है, न कि आंदोलन को दबाने के उद्देश्य से.
हालांकि, प्रभावित आदिवासी किसानों का कहना है कि जब तक उन्हें उनकी अधिग्रहित जमीन का उचित मुआवजा, पुनर्वास और अन्य अधिकार नहीं मिल जाते, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा. किसानों का आरोप है कि विकास परियोजनाओं का सबसे बड़ा बोझ गांवों और आदिवासी परिवारों पर पड़ रहा है, लेकिन उनके हितों की अनदेखी की जा रही है.
केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर सरकार और प्रभावित किसानों के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है.
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