सरसों की फसल से जहां इस बार उत्पादन बढ़ा है तो वहीं किसानों की आय में भी इजाफा हुआ है. उत्तर प्रदेश में भी बहुत संख्या किसानों ने गेहूं की जगह सरसों की फसल को चुना है. किसानों का मानना है कि सरसों की खेती करने से कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है. सरसों के बीज से जहां तेल मिलता है तो वहीं उसकी डंठल से भी अतिरिक्त आय मिलती है. डंठल को इन दिनों ईट भट्ठा चलाने वाले लोग 500 से ₹600 प्रति क्विंटल के भाव से खरीद रहे हैं तो इसलिए किसानों को भी यह काफी फायदे का सौदा साबित हो रहा है. वहीं, सरसों की खेती को पशुओं से कोई नुकसान भी नहीं होता है. यहां तक कि गेहूं के मुकाबले सरसों में केवल एक सिंचाई की जरूरत होती है.
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