अब नहीं होगी खाद की कमीभारत की खेती में उर्वरक बहुत जरूरी होते हैं. बिना उर्वरक के अच्छी फसल नहीं हो सकती. अब देश की खेती एक नए दौर में जा रही है, जहां तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है, नए निवेश आ रहे हैं और नए तरीके से खेती हो रही है. पहले उर्वरक पर सरकार की सब्सिडी ज्यादा थी, लेकिन अब धीरे-धीरे यह व्यवस्था बदल रही है. ऐसे में जरूरी है कि उर्वरक से जुड़े नियम भी समय के साथ बदलें, ताकि खेती सुरक्षित रहे, किसानों को सही दाम पर खाद मिले और देश आत्मनिर्भर बन सके.
साल 2025 में उर्वरक सेक्टर में कुछ अच्छे बदलाव देखने को मिले. कच्चे माल पर जीएसटी कम किया गया, खाद के सैंपल जांच के लिए बारकोड सिस्टम लाया गया और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में निरीक्षकों की संख्या कम की गई. साथ ही नए बायो-स्टिमुलेंट्स को नियमों में शामिल किया गया. इन बदलावों से खाद की पहचान आसान हुई, नियमों का पालन बेहतर हुआ और इस क्षेत्र में थोड़ा सिस्टम आया. लेकिन यह अभी शुरुआत है, आगे और सुधार जरूरी हैं.
आज के समय में कंप्यूटर और मोबाइल का इस्तेमाल हर जगह हो रहा है, लेकिन उर्वरक से जुड़े कई काम अभी भी धीमे हैं. भारत को कई कच्चे माल बाहर से मंगाने पड़ते हैं और जब दूसरे देश सप्लाई रोक देते हैं, तो कंपनियों को जल्दी नया स्रोत ढूंढना पड़ता है. ऐसे में राज्यों के पुराने नियम और कागजी काम देरी करते हैं. अगर पूरे देश के लिए एक डिजिटल पोर्टल हो, जहां उर्वरक से जुड़े सभी काम ऑनलाइन और तेजी से हों, तो कंपनियां समय पर खाद ला सकेंगी और किसानों को परेशानी नहीं होगी.
आज उर्वरक नियमों में छोटी गलती और बड़ी धोखाधड़ी दोनों को एक जैसा अपराध माना जाता है. इससे ईमानदार कारोबारियों को डर लगता है. जरूरी है कि हल्की गुणवत्ता की कमी को सुधार की तरह देखा जाए, न कि अपराध की तरह. असली सजा सिर्फ उन्हीं को मिले जो जानबूझकर मिलावट या धोखा करते हैं. इससे कारोबार करना आसान होगा और लोग नियमों के अंदर रहकर काम करेंगे.
अगर भारत में ही ज्यादा उर्वरक बनेंगे, तो किसानों को सस्ती खाद मिलेगी और देश को बाहर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. इसके लिए जरूरी है कि पूरे देश में एक ही लाइसेंस से काम करने की सुविधा मिले. इससे कंपनियों का खर्च कम होगा, काम तेज होगा और किसानों को फायदा मिलेगा. साथ ही सरकार को चाहिए कि जीएसटी का रुका हुआ पैसा लौटाए, देश में कच्चे माल के कारखाने लगाने में मदद करे और रिसर्च पर ज्यादा ध्यान दे.
उर्वरक 3.0 का मतलब है डिजिटल नियम, आसान कानून और सही आज़ादी. अगर ये तीनों सुधार सही तरीके से लागू होते हैं, तो उर्वरक उद्योग मजबूत होगा, किसान खुश होंगे और भारत की खेती का भविष्य सुरक्षित बनेगा. यह बदलाव न सिर्फ आज के लिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है.
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